रायपुर।सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकाली जा रही छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथयात्रा अपने आठवें दिन सिरपुर महोत्सव (माघी पुन्नी) के अवसर पर ऐतिहासिक तीर्थ स्थल सिरपुर पहुँची। रथयात्रा को रोकने की कोशिशें पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा की गईं, लेकिन जनसमर्थन के आगे वे असफल रहीं।
रथयात्रा ने सिरपुर मेला क्षेत्र सहित आसपास के गांव परसाडीह, पीढ़ी, मोहकम, खड़सा, सेनकपाट और खमतराई में भ्रमण किया। जैसे ही रथ गांवों में पहुँचा, पूरा इलाका
“छत्तीसगढ़ी महतारी की जय”, “सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज जिंदाबाद” और
“छत्तीसगढ़ी अस्मिता का अपमान नहीं सहेंगे”
जैसे नारों से गूंज उठा।
रथयात्रा के दौरान अवैध रूप से संचालित करणीकृपा प्रा. लि. के खिलाफ किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बाहरी कंपनियों को संरक्षण देकर जल, जंगल, जमीन और खेती को बर्बाद किया जा रहा है, जबकि प्रशासन आर्थिक लाभ के लिए आंखें मूंदे बैठा है।
छत्तीसगढ़ी महतारी की वंदना और लोकगायक लक्ष्मण मस्तुरिया के गीत “मोर संग चलव” ने किसानों, महिलाओं और युवाओं को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। रथयात्रा के मुद्दों से प्रभावित होकर सैकड़ों किसानों ने सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज की सदस्यता ग्रहण की, जिनमें नगर पंचायत अध्यक्ष सहित कई समाज के प्रतिष्ठित पदाधिकारी भी शामिल रहे।
पीढ़ी, मोहकम, खड़सा, खमतराई और सिरपुर में आयोजित सभाओं को राज्य आंदोलनकारी किसान नेता लालाराम वर्मा, आदिवासी नेता अशोक कश्यप, बृज बिहारी साहू, रूप सिंह निषाद, अवजाराम साहू, छन्नू साहू और नंद कुमार साहू ने संबोधित किया।

सभा को संबोधित करते हुए लालाराम वर्मा ने कहा कि बाहरी उद्योगपति, व्यापारी और अधिकारी छत्तीसगढ़ी महतारी की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिसे रोकने के लिए छत्तीसगढ़िया समाज को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
वहीं अशोक कश्यप ने आरोप लगाया कि खैरझिटी में गैरकानूनी ढंग से स्थापित उद्योग के कारण तुमगांव और सिरपुर क्षेत्र का पर्यावरण, खेती और जनजीवन खतरे में है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो विश्व धरोहर सिरपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि करीब 60 गांवों के किसान, जवान और महिलाएं इस रथयात्रा के माध्यम से जुड़ चुके हैं और छत्तीसगढ़िया अस्मिता की रक्षा के लिए आगे आने को तैयार हैं।







