बालोद में पूर्व भाजपा विधायक सहित 7,565 किसान धान नहीं बेच पाए, जांजगीर में कर्ज से टूटकर किसान हाईटेंशन टावर पर चढ़ा

Madhya Bharat Desk
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रायपुर/बालोद/जांजगीर।छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अंतिम दिन सरकार के ‘एक-एक दाना खरीदने’ के दावे ज़मीनी हकीकत में बिखरते नजर आए। बालोद जिले में अव्यवस्था अपने चरम पर रही, जहां 7 हजार 565 किसान एक दाना भी धान नहीं बेच सके। वहीं जांजगीर-चांपा जिले में धान नहीं बिक पाने और कर्ज के दबाव से टूटे एक किसान ने हाईटेंशन बिजली टावर पर चढ़कर आत्मघाती कदम उठा लिया।

बालोद में व्यवस्था ध्वस्त, किसान सड़कों पर

बालोद जिले में शुक्रवार को धान खरीदी के अंतिम दिन सुबह से ही खरीदी केंद्रों में अफरा-तफरी मची रही। शाम होते-होते खरीदी पोर्टल लॉक हो गया, जिससे हजारों किसान केंद्रों के बाहर बैठे रह गए। हालात इतने बिगड़े कि कई जगह चक्का जाम, हंगामा और झूमा-झटकी की स्थिति बन गई।

संजारी-बालोद क्षेत्र की पूर्व भाजपा विधायक कुमारी बाई साहू भी इस अव्यवस्था से नहीं बच सकीं। वे अपने बेटे और प्रदेश किसान मोर्चा के कार्यकारिणी सदस्य नरेश साहू के साथ सुबह 9 बजे से देर रात तक खरीदी केंद्र के बाहर बैठी रहीं, लेकिन उनका 268 क्विंटल धान नहीं बिक सका। कई किसान मजबूरी में रातभर सोसायटी परिसर में ही सो गए।

15 जनवरी से टोकन बंद, किसान भटके – नरेश साहू

नरेश साहू ने बताया कि 15 जनवरी के बाद धान टोकन जारी होना बंद हो गया, जिससे बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हुए। उन्होंने सहकारिता विभाग और अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं।

लक्ष्य से 12 लाख क्विंटल कम खरीदी

जिले में 143 खरीदी केंद्रों के माध्यम से 1 लाख 47 हजार 554 किसानों ने लगभग 69.78 लाख क्विंटल धान बेचा, जबकि 1 लाख 55 हजार 119 किसान पात्र थे। यानी 7,565 किसान एक बार भी धान नहीं बेच पाए।

राज्य शासन ने बालोद जिले के लिए 82 लाख क्विंटल का लक्ष्य तय किया था, लेकिन खरीदी 12.21 लाख क्विंटल कम रह गई।

जांजगीर में दर्दनाक तस्वीर: किसान टावर पर चढ़ा

इधर जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम कसौंदी में धान नहीं बिकने की पीड़ा ने एक किसान को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। किसान अनिल सूर्यवंशी (अनिल गढ़वाल) टोकन नहीं कटने और करीब 1.50 लाख रुपये के कर्ज से मानसिक रूप से टूट गया।

पहले वह 28 क्विंटल धान बेच चुका था, लेकिन शेष 29 क्विंटल धान का टोकन नहीं कटने से उसकी परेशानी बढ़ती गई। निराशा और गुस्से में वह हाईटेंशन बिजली टावर पर चढ़ गया।

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। करीब 6 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद अधिकारियों की समझाइश से किसान को सुरक्षित नीचे उतारा गया।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

कांग्रेस जिलाध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने कहा कि खरीदी लिमिट और टोकन प्रक्रिया किसानों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनी। भाजपा सरकार का ‘एक-एक दाना खरीदी’ का दावा खोखला साबित हुआ है।

वहीं प्रशासन का दावा है कि जिले में धान खरीदी के मामले में बालोद प्रदेश में टॉप पर है और कई किसानों ने रकबा समर्पण किया, जिससे आंकड़े प्रभावित हुए।

सवाल कायम

हालांकि आंकड़ों के बीच एक सवाल साफ है—

जब हजारों किसान धान नहीं बेच पाए और एक किसान आत्महत्या जैसे कदम तक पहुंच गया, तो क्या मौजूदा धान खरीदी व्यवस्था वाकई किसानों के हित में है?

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