रायपुर में NIT चौपाटी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं ने काले कपड़े पहनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन देने का कार्यक्रम रखा, लेकिन पुलिस ने उन्हें गांधी मैदान के बाहर ही रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली।
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के नेतृत्व में निकले इस मार्च में कार्यकर्ता “चौपाटी शिफ्टिंग” को लेकर गुस्से में नजर आए। कुछ देर चले तनाव के बाद चर्चा हुई और कांग्रेसियों को वापस लौटना पड़ा।
कांग्रेस का आरोप: फैसला मनमाना, जांच जरूरी
NIT चौपाटी को आमानाका शिफ्ट किए जाने पर कांग्रेस लंबे समय से आपत्ति जता रही है। विवाद तब और बढ़ गया, जब कुछ दिन पहले युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधायक राजेश मूणत के पोस्टर पर कालिख पोत दी थी। इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद यूथ कांग्रेस और NSUI ने सरस्वती नगर थाना का घेराव किया।
उन्होंने मांग रखी कि—
- चौपाटी विवाद की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई जाए
- पहले अनुमति देने और बाद में अवैध बताने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो
- निर्णयों पर राजनीतिक दबाव की जांच हो
- भविष्य के लिए स्पष्ट नीति तय की जाए
कांग्रेस ने चेतावनी भी दी है कि 7 दिनों में कार्रवाई न होने पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
नालंदा-2 प्रोजेक्ट से गरमाई राजनीति
करीब 10 करोड़ रुपए खर्च कर तैयार हुई इस चौपाटी को भाजपा सरकार ने हटाकर यहां नालंदा-2 बनाने का फैसला लिया है। नवंबर 2025 में इसके टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
कांग्रेस इसे एकतरफा निर्णय बताकर लगातार विरोध कर रही है।
अब यह मुद्दा सिर्फ चौपाटी का नहीं, बल्कि रायपुर की सियासत का बड़ा राजनीतिक मोर्चा बन चुका है, जिसकी तपिश दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।



