जांजगीर-चांपा। अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस पर जिला प्रशासन और यूनिसेफ द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब ज्ञान मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नवागढ़ की कक्षा 11वीं की छात्रा कुमारी दीक्षा सारथी को 15 मिनट के लिए जिले की प्रतीकात्मक कलेक्टर बनाया गया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने स्वयं दीक्षा को यह जिम्मेदारी सौंपते हुए उनके विचारों और आत्मविश्वास की सराहना की।
प्रतीकात्मक कलेक्टर की कुर्सी संभालते ही दीक्षा ने युवा पीढ़ी और जिले के नागरिकों के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव रखे, जिन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
1. डिजिटल फास्टिंग — महीने में एक दिन स्क्रीन से दूरी
दीक्षा ने कहा कि अत्यधिक मोबाइल और स्क्रीन उपयोग ने मानसिक थकान और परिवारों के बीच दूरी पैदा कर दी है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि महीने में एक दिन पूरी तरह डिजिटल फास्टिंग मनाई जाए, जिसमें बच्चे और युवा किताबें पढ़ें, खेलें, आउटडोर गतिविधियाँ करें और परिवार के साथ समय बिताएँ।
2. प्लास्टिक मुक्त जिला — हर घर से निकले कपड़े का थैला
उन्होंने अपील की कि बाजार जाते समय कपड़े या जूट के बैग का प्रयोग अनिवार्य किया जाए और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को पूरी तरह बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि छोटा बदलाव भी बड़ा परिणाम ला सकता है।
3. ‘एक पेड़ माँ के नाम’ — भावनात्मक पर्यावरणीय संदेश
दीक्षा ने जिलेवासियों से आग्रह किया कि हर व्यक्ति अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी निरंतर देखभाल का संकल्प ले।
अधिकारियों की सराहना
कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने दीक्षा को बधाई देते हुए कहा,
“बच्चों की रचनात्मक सोच समाज में सकारात्मक परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत है।”
इस अवसर पर यूनिसेफ जिला समन्वयक विनोद साहू और युवोदय हसदेव के हीरो वालंटियर्स, सहित कई अधिकारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।







