छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत लालपुर इन दिनों सुर्खियों में है। पंचायत सचिव और सरपंच पर ग्रामीणों ने गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ग्रामीण जगेश्वर प्रसाद राज ने अक्टूबर माह में इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में दर्ज कराई थी। आरोप है कि पंचायत में हुए निर्माण कार्यों—जैसे सड़क, मंच निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना—में लाखों रुपये का घोटाला किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि गाँव की पूर्व सरपंच संतोषी नेटी और वर्तमान सरपंच धनश्वर सिंह ने सचिव मोहम्मद हसन और एक जियोटेका इंजीनियर के साथ मिलकर कागज़ों में फर्जी निर्माण दिखाकर लाखों रुपये का गबन किया। बताया जा रहा है कि सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई सीसी रोड को पंचायत निर्माण बताकर सचिव व सरपंच ने मिलकर भारी राशि का आहरण किया। यही नहीं, पीएम आवास योजना में भी गड़बड़ी करते हुए एक सरकारी कर्मचारी और उसकी पत्नी के नाम पर आवास का आवंटन कर दिया गया।
शिकायत के बाद कलेक्टर अजीत वसंत ने एसडीएम को जांच के निर्देश दिए, जिसके बाद 10 अक्टूबर को तीन सदस्यीय टीम गठित की गई। इसी तरह जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग ने भी 13 अक्टूबर को चार सदस्यीय जांच टीम बनाने का आदेश दिया था, जिसे एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी थी। लेकिन सरकारी सिस्टम की ‘धीमी रफ्तार’ का आलम यह है कि 23 दिन बीत जाने के बाद भी जांच अधूरी है।
सूत्रों के अनुसार, पंचायत सचिव और सरपंच एसडीएम जांच टीम की मौजूदगी में जांच से बचते नजर आ रहे हैं। वहीं, जिला पंचायत की टीम जब गांव पहुंची तो ग्रामीणों की नाराजगी के बजाय स्वागत-सत्कार की खबरें सामने आईं। इससे जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ग्राम पंचायत लालपुर में हुआ यह कथित भ्रष्टाचार कोई अकेला मामला नहीं माना जा रहा। आसपास की कई पंचायतों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें लाखों के गबन के आरोप हैं। मगर अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव लोगों में नाराजगी और अविश्वास बढ़ा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “फिल्मी पंचायत” के सचिव जी तो गांव की सड़क के लिए विधायक से लड़ जाते हैं, लेकिन असली पंचायत के सचिवों ने सड़क के नाम पर ही घोटाले की सड़क बना डाली। सवाल यह है कि क्या इस बार दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर फाइलें धूल फांकती रहेंगी।



