छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे को लेकर रेलवे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार हादसे में शामिल लोको पायलट हाल ही में प्रमोट हुए थे और इससे पहले वे मालगाड़ी चला रहे थे। प्रमोशन के बाद मात्र एक महीने पहले उन्हें पैसेंजर ट्रेन की कमान सौंपी गई थी।
रेलवे की पांच सदस्यीय प्रारंभिक जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) को सौंपी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हादसे वाली ट्रेन गतोरा स्टेशन से रवाना होने के बाद लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। जबकि इससे पहले के स्टेशनों में ट्रेन की स्पीड 76 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई थी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जिस स्थान पर यह हादसा हुआ वहां ट्रैक में एक तीखा मोड़ (कर्व) था। आशंका जताई जा रही है कि लोको पायलट ने दूसरी लाइन का सिग्नल देखकर भ्रमवश ट्रेन की रफ्तार बढ़ा दी। इसी बीच सामने मालगाड़ी दिखने पर उन्होंने स्पीड कंट्रोल करने और इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
जांच टीम का कहना है कि हादसे का प्रमुख कारण सिग्नल जंप प्रतीत होता है। CRS की विशेष टीम अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी और अंतिम रिपोर्ट जल्द पेश की जाएगी।
सुरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्रा खुद बिलासपुर पहुंचे हैं और उन्होंने जांच प्रक्रिया की निगरानी शुरू कर दी है। इसके साथ ही 19 अधिकारियों और रेलवे कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि हादसे के हर तकनीकी और मानवीय पहलू को समझा जा सके।
घटना के बाद रेलवे ने राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू किया था। देर रात तक क्रेन की मदद से ट्रैक पर गिरे डिब्बों को हटाया गया। हादसे ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें CRS की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस दर्दनाक हादसे के असली कारणों का खुलासा करेगी।



