रायपुर। जल जीवन मिशन के तहत राज्य सरकार ने दीपावली से पहले बड़ी रकम जारी की है। इस बार 207 करोड़ रुपये की राशि राज्यांश के रूप में जिलों को दी गई है। लेकिन इस फंड में मल्टी विलेज योजनाओं को प्राथमिकता दी गई, जबकि सिंगल विलेज एजेंसियों को बहुत कम हिस्सा मिला।
सूत्रों के अनुसार, जारी की गई राशि में से लगभग 128 करोड़ रुपये मल्टी विलेज योजनाओं के भुगतान के लिए आबंटित किए गए, जबकि सिंगल विलेज प्रोजेक्ट्स के लिए सिर्फ 79 करोड़ रुपये का ही प्रावधान किया गया। इससे छोटी एजेंसियों में असंतोष की स्थिति बन गई है।
बड़ी एजेंसियों को मिला पूरा भुगतान
विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई बड़ी और पसंदीदा एजेंसियों को बिल जमा करने के कुछ ही दिनों में भुगतान कर दिया गया है, जबकि छोटे कॉन्ट्रैक्टर और एजेंसियां महीनों से भुगतान की प्रतीक्षा कर रही हैं। इससे एक बार फिर फंड वितरण में भेदभाव के आरोप लगने लगे हैं।
अंदरूनी नाराजगी और असंतोष
विभाग के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, जिलों को उनकी डिमांड के अनुसार फंड आबंटन नहीं किया गया। कई जिलों में आवश्यकता से बहुत कम राशि भेजी गई, जिससे कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। विशेष रूप से बस्तर संभाग के जिलों में सौ फीसदी भुगतान अब भी नहीं हुआ है।
केंद्रांश अब तक जारी नहीं
यह पहली बार है जब केंद्रांश जारी न होने के बावजूद राज्यांश की राशि दी गई। इससे पहले भी जब राज्यांश जारी हुआ था, तो उसे कुछ समय बाद वापस ले लिया गया था। उस वक्त भी सिंगल विलेज एजेंसियों को भुगतान अधूरा रह गया था, जबकि चुनिंदा बड़ी एजेंसियों को पूरी रकम दे दी गई थी।
जल जीवन मिशन की फंडिंग को लेकर एक बार फिर भेदभाव और पक्षपात के आरोप गहराते जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द ही इस मामले में पारदर्शिता लाएं और सभी एजेंसियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करें।



