छत्तीसगढ़ में आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2025 में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और अहम ऐलान किया गया। बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षकों की सक्रिय भूमिका ही एक समृद्ध छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। इस बैठक में शिक्षा विभाग की योजनाओं की समीक्षा की गई और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उन शिक्षकों को प्रोत्साहित करने की बात कही जो अपने स्कूलों में अच्छा कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूलों में आधार आधारित अटेंडेंस मॉनिटरिंग सख्ती से लागू की जाएगी और उपस्थिति में गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही शाला विकास समितियों को भी सक्रिय करने के निर्देश दिए गए ताकि अभिभावकों के सहयोग से बच्चों की उपस्थिति बढ़ाई जा सके।
बैठक में ड्रॉप-आउट दर घटाने और Gross Enrolment Ratio (GER) को 100 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रत्येक बच्चे का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा और उनकी नियमित उपस्थिति पर नजर रखी जाएगी।
इसके अलावा बीजापुर जिले के स्थानीय भाषा आधारित शिक्षा मॉडल को एक सफल उदाहरण के रूप में पेश किया गया। यहां 10वीं और 12वीं पास स्थानीय युवाओं की मदद से कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई स्थानीय बोली ‘गोंडी’ में करवाई जा रही है। इस प्रयास से बच्चों की स्कूल उपस्थिति में बढ़ोतरी हुई है और ड्रॉप-आउट दर में कमी आई है। मुख्यमंत्री ने इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने पर जोर दिया।
आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग करने की बात कही गई। 31 दिसंबर तक सभी छात्रों के लिए 12 अंकों का APAR ID बनाया जाएगा, जो DigiLocker से जुड़ा रहेगा और छात्रों की शैक्षणिक प्रगति, छात्रवृत्ति और पुस्तकों के वितरण में मदद करेगा। साथ ही YouTube और PM ई-विद्या प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल शिक्षा का विस्तार किया जाएगा।
दंतेवाड़ा जिले का उदाहरण देते हुए यह भी बताया गया कि हाल में 10वीं बोर्ड परीक्षा में 9.32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो शिक्षा विभाग, शिक्षकों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा सुधार का यह नया अध्याय सभी जिलों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।







