पटना।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी बढ़ते ही राजनीतिक दलों के दफ्तरों में टिकट की दौड़ तेज हो गई है। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार अपने बायोडाटा जमा कराने के लिए पार्टी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। हर दावेदार खुद को पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता और समाज सेवा के लिए प्रतिबद्ध बताकर टिकट की मांग कर रहा है।
पार्टी नेताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए उम्मीदवार तकनीक का भी सहारा ले रहे हैं। रंगीन और आकर्षक डिज़ाइन वाले बायोडाटा तैयार करवाने की होड़ मची है। पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित चुनाव सामग्री की दुकानों पर इन दिनों बायोडाटा बनवाने वालों की भारी भीड़ देखी जा रही है।
दुकानदार सत्येंद्र नारायण सिंह बताते हैं, “हर दिन सौ से ज्यादा लोग अपने राजनीतिक बायोडाटा बनवाने आ रहे हैं। कोई इसे ग्लॉसी पेज पर तैयार करा रहा है तो कोई साधारण फॉर्मेट में। सबसे ज्यादा डिमांड बेगूसराय और पटना जिले से आ रही है।”
बायोडाटा तैयार करवाने की कीमत 100 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। उम्मीदवार अपने राजनीतिक सफर, सामाजिक कार्यों, जातीय समीकरण और जनता से जुड़ाव को प्रमुखता से दिखाने में जुटे हैं।
राज्य की प्रमुख पार्टियां — जदयू, भाजपा, राजद, कांग्रेस और जनसुराज — सभी के कार्यालयों में टिकट के लिए आवेदन देने वालों की भीड़ लगी है। कई उम्मीदवार सुबह से रात तक पार्टी दफ्तरों में वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की कोशिश करते देखे जा रहे हैं।
बायोडाटा के साथ उम्मीदवार अपने सामाजिक कार्यों के सबूत के तौर पर अखबारों की कटिंग, सोशल मीडिया पोस्ट और तस्वीरें भी जोड़ रहे हैं। उम्मीदवार यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे न केवल पार्टी के प्रति वफादार हैं, बल्कि जनता से गहराई से जुड़े हुए हैं।
बिहार चुनाव 2025 में टिकट पाने की यह बायोडाटा रेस, यह साफ कर रही है कि अब राजनीति में समर्पण और प्रस्तुति दोनों की परीक्षा साथ-साथ चल रही है।



