राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से जुड़े फंडिंग नेटवर्क का बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी ने चार आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है, जिन पर माओवादी गतिविधियों के लिए धन संग्रह, भंडारण और वितरण का आरोप है।
आरोपियों में सुनीता पोटाम, शंकर मुचाकी और दशरथ उर्फ दसरू मोडियम शामिल हैं, जो मूलवासी बचाओ मंच (एमबीएम) के पदाधिकारी थे। यह संगठन माओवादी फ्रंटल ग्रुप माना जाता है और इसे छत्तीसगढ़ सरकार ने अक्टूबर 2023 में विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, 2005 की धारा 3(1) के तहत प्रतिबंधित कर दिया था। चौथा आरोपी मल्लेश कुंजाम, सीपीआई (माओवादी) का सशस्त्र कार्यकर्ता है और अभी भी फरार है।
एनआईए की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने विभिन्न बैंक खातों और चैनलों के माध्यम से अवैध धनराशि को माओवादियों तक पहुँचाया। यह धन लोकतांत्रिक सरकार और राज्य में चल रहे विकास कार्यों के विरोध को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया गया।
इस मामले में अब तक कुल सात आरोपियों पर आरोप तय किए जा चुके हैं, जिनमें छह गिरफ्तार हो चुके हैं। बीजापुर पुलिस ने मई 2023 में दो आरोपियों, गजेंद्र माडवी और लक्ष्मण कुंजम, से 6 लाख रुपये जब्त किए थे। बाद में फरवरी 2024 में यह मामला एनआईए को सौंपा गया। अगस्त 2025 में एजेंसी ने पहला पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें रघु मिदियामी का नाम भी जोड़ा गया।
एनआईए फिलहाल इस मामले (RC-02/2023/NIA/RPR) की जांच जारी रखे हुए है और फरार आरोपी मल्लेश कुंजाम की तलाश तेज कर दी गई है।



