एम्स रायपुर में मरीजों की परेशानी: फटे गद्दों पर इलाज, आराम के बजाय बढ़ रही तकलीफ

Madhya Bharat Desk
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बुनियादी सुविधाओं पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), जो देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है, इन दिनों मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर विवादों में है। मरीजों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में उपलब्ध गद्दे बेहद खराब स्थिति में हैं। वे फटे हुए, कई हिस्सों में बंटे और इतने कठोर हैं कि एक स्वस्थ व्यक्ति भी उन पर आराम से नहीं सो सकता।

मरीजों का दर्द

विशेषकर ऑपरेशन के बाद रिकवरी कर रहे मरीजों और नई माताओं के लिए यह स्थिति और भी कष्टकारी है। मरीजों का कहना है कि इलाज तो उन्हें मिल रहा है, लेकिन बुनियादी आराम से वंचित होने के कारण उनकी तकलीफ़ और बढ़ रही है।

उम्मीदों पर पानी

एम्स जैसा बड़ा और प्रतिष्ठित संस्थान जहां उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाओं के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह की लापरवाही को लोग मरीजों के साथ अन्याय मान रहे हैं। परिजनों का कहना है कि इलाज के साथ-साथ न्यूनतम आराम भी जरूरी है, वरना स्वस्थ होने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

स्वास्थ्य पर असर

फटे और असुविधाजनक गद्दों पर लेटने से मरीजों को अतिरिक्त दर्द और थकान झेलनी पड़ रही है। यह स्थिति न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर, बल्कि मानसिक स्थिति और अस्पताल के अनुभव पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।

प्रबंधन से उम्मीदें

मरीजों और परिजनों ने मांग की है कि एम्स रायपुर प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान दे। गद्दों को बदलकर मरीजों को आरामदायक और सुरक्षित बिस्तर उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे सम्मानजनक माहौल में तेजी से स्वस्थ हो सकें।

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