मध्य प्रदेश के भिंड जिले की लहार तहसील में, दबोह कस्बे के पास ग्राम अमाहा नामक स्थल पर एक ऐसा प्राचीन मंदिर स्थित है, जो भक्तों और ये खिलौने विश्वास के लिए रहस्य बन गया है। यह मंदिर रणकौशला देवी (जिसे स्थानीय रूप से रेंहकोला देवी भी कहा जाता है) को समर्पित है।
ऐतिहासास्वरूप विवरण
यह माना जाता है कि यह मंदिर चन्देल राजाओं के समय में स्थापित था। क्षेत्रीय लोक कथाओं के अनुसार, वीर मलखान नामक एक भक्त और उनकी पत्नी गजमोतिन ने मंत्रपूजा और देवी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मंदिर की स्थापना और देवी की प्रतिमा की स्थापित करने वाली कथा आज भी लोकमान्यता में जीवित है।
रहस्यमयी परंपरा और आस्था
मंदिर के निवासियों और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन सुबह, जब मंदिर के प्रातः दरवाजे खोले जाते हैं, तो पूजा के कुछ सामग्री पहले से ही मौजूद होती हैं — जैसे फूल, अक्षत, जल आदि। ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई “अदृश्य शक्ति” स्वयं पूजा करती है। इस चमत्कारी घटना ने इस मंदिर को एक विशेष धार्मिक केंद्र बना दिया है।
मंदिर के पुजारी और कुछ स्थानीय लोग यह मानते हैं कि वीर मलखान का आत्मा अभी भी सूक्ष्म स्वरूप में देवी की पूजा करने आती है। इस विश्वास को मजबूत करने के लिए यह कहा जाता है कि आज भी देवी की प्रतिमा अभिषिक्त प्रतीत होती है, मानो पूजा-अर्चना हो चुकी हो।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
यह मंदिर न सिर्फ स्थानीय आस्था का केंद्र है, बल्कि आसपास के जिलों से भक्तों को आकर्षित करता है। नवरात्र और अन्य त्यौहारों के अवसर पर यहाँ विशेष मेले और श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। लोग अपनी मनोकामनाओं के लिए देवी के समक्ष प्रार्थना करते हैं और यह विश्वास करते हैं कि यह अदृश्य पूजा उनकी कृपा का प्रतीक है।
इस रहस्यमयी घटना की चर्चा अक्सर सामाजिक मंचों और स्थानीय जनश्रुतियों में होती है। किसी कैमरा या बाहरी जांचकर्ता ने इस घटना की पुष्टि नहीं की है, परंतु आस्था और विश्वास की गहराई ने इसे एक लोकप्रिय धार्मिक कथा बना दिया है।



