प्रदेशभर से आए ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कार्य पूरे होने के बाद भी महीनों से भुगतान लंबित है। अधिकारियों द्वारा जानबूझकर फाइलें रोकी जाती हैं और बिना रिश्वत दिए बिल पास नहीं किए जाते। कई ठेकेदार अपने पैसे लगाकर काम करते हैं, लेकिन भुगतान न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। ठेकेदारों का कहना है कि अधिकारियों की मनमानी से सरकार की छवि खराब हो रही है और विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके हैं।
बैठक में ठेकेदारों का आक्रोश
मंगलवार दोपहर रायपुर के होटल क्लार्क इन में छत्तीसगढ़ कॉन्ट्रेक्टर एसोसिएशन की प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में जगदलपुर, कांकेर, कवर्धा, बिलासपुर, धमतरी, दुर्ग समेत कई जिलों से आए ठेकेदारों ने अपनी समस्याएं रखीं। ठेकेदारों ने कहा कि महीनों से भुगतान नहीं हुआ है और विभागीय अधिकारी टेंडर में हेराफेरी करते हैं।
अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों को नोटिस थमाकर परेशान किया जाता है, सवालों की बौछार कर फाइल अटका दी जाती है और कई बार रात में टॉर्च की रोशनी में स्पॉट इंस्पेक्शन करके दबाव बनाया जाता है। इससे ठेकेदारों की कंपनियों में काम कर रहे इंजीनियर और मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं।
भुगतान न मिलने से बढ़ा कर्ज
ठेकेदारों ने बताया कि भुगतान न मिलने से वे कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। जीएसटी की जटिल नियमावली और बैंकों से लिया गया ऋण उनकी स्थिति और खराब कर रहा है। अब ठेकेदार और कर्ज लेकर काम करने की स्थिति में नहीं हैं।

800 करोड़ रु. से अधिक भुगतान अटका
बैठक में यह तथ्य सामने आया कि केवल बस्तर संभाग में ही लगभग 800 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है। इससे विकास कार्य रुक गए हैं।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों से करेंगे मुलाकात
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेश शुक्ला ने बताया कि ठेकेदार अब एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मुख्य सचिव सहित अन्य उच्चाधिकारियों से प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करेगा। इसके अलावा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा से भी ठेकेदार अपनी समस्याएं साझा करेंगे।
अधिकारियों की मनमानी रोकने की मांग
ठेकेदारों का कहना है कि यदि एसोसिएशन संगठित होकर विरोध करे तो अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ ठेकेदार अपने निजी फायदे के लिए अधिकारियों की चापलूसी करते हैं, जिससे बाकी ठेकेदारों की बदनामी होती है। इसलिए अब केवल भाषण नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने होंगे।
भाजपा संगठन से भी अपेक्षा
बैठक में ठेकेदारों ने यह भी कहा कि भाजपा संगठन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि आखिर भुगतान में अड़चन कहां है और उसे कैसे दूर किया जा सकता है। मुख्यमंत्री के अधीन जल संसाधन विभाग सहित कई विभागों में महीनों से भुगतान रुका हुआ है।







