रायपुर:छत्तीसगढ़ के बस्तर, राजनांदगांव और बिजापुर जिलों में पिछले 17 महीनों के भीतर हजारों वनाधिकार पट्टों की संख्या रिकॉर्ड से कम हो गई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेज बताते हैं कि कई जगह व्यक्तिगत (IFR) और सामुदायिक (CFRR) पट्टों की संख्या में अचानक गिरावट आई है, जबकि वनाधिकार कानून (FRA) में पट्टा रद्द करने का कोई प्रावधान मौजूद नहीं है।
मुख्य आंकड़े
- बस्तर: IFR पट्टे 37,958 से घटकर 35,180 हुए।
- राजनांदगांव: CFRR पट्टे 40 से घटकर 20 रह गए।
- सरकार का दावा: रिपोर्टिंग और संचार त्रुटि की वजह।
- विशेषज्ञों की राय: कानूनी रूप से रद्द करना असंभव, रिकॉर्ड-प्रबंधन में गंभीर खामी।
- मई 2025 तक पूरे राज्य में 4.82 लाख व्यक्तिगत और 4,396 सामुदायिक पट्टे।
RTI में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
‘द हिंदू’ को प्राप्त मासिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2024 से मई 2025 के बीच बस्तर जिले में 2,700 से अधिक व्यक्तिगत पट्टे कम हो गए। वहीं, राजनांदगांव में सिर्फ एक महीने में सामुदायिक पट्टों की संख्या आधी रह गई।
सरकार का कहना है कि यह “मिसकम्युनिकेशन” और “डेटा एंट्री की गलती” का नतीजा है। लेकिन FRA विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होना कानूनी तौर पर संभव नहीं और यह राज्य के रिकॉर्ड-मैनेजमेंट सिस्टम की गहरी खामियों को उजागर करता है।
नक्सल प्रभावित जिलों में धीमी प्रगति
- बस्तर: IFR में 2,700 की कमी, CFRR में 12 की बढ़ोतरी।
- दंतेवाड़ा: IFR में 55 की वृद्धि, CFRR में कोई बदलाव नहीं।
- मोहला-मानपुर: नया IFR नहीं, केवल 2 नए CFRR जुड़े।
विशेषज्ञों की राय
FRA विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार सरकार ने ऐसे ग्राम सभाओं के नाम पर भी पट्टे दर्ज किए हैं, जिन्होंने आवेदन तक नहीं किया। यह प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और रिकॉर्ड सिस्टम में गंभीर खामी की ओर इशारा करता है।
केंद्रीय पहल
इस समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 2024 में ‘धरती अबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ शुरू किया है, जिसके तहत 300 से अधिक FRA सेल स्थापित किए जाएंगे।







