हसदेव अरण्य पर भाजपा का यू-टर्न: चुनावी वादों और जमीनी हकीकत में बड़ा विरोधाभास

Madhya Bharat Desk
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5 लाख पेड़ों को काटने का रास्ता साफ़ : हसदेव अरण्य में केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को वन विभाग की हरी झंडी। छत्तीसगढ़ विधानसभा संकल्प को दरकिनार कर अडानी के पक्ष में वन स्वीकृति का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए

छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कथनी और करनी में बड़ा विरोधाभास सामने आया है। 2023 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने अपने ‘मोदी की गारंटी’ वाले घोषणापत्र में हसदेव अरण्य में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ मुखर थी। पार्टी ने तब पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अधिकारों की वकालत की थी।

हालांकि, सत्ता में आने के बाद, भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार ने अब हसदेव अरण्य में 5 लाख पेड़ों की कटाई का आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश उन चुनावी वादों के ठीक उलट है, जिनके दम पर पार्टी ने जनता का समर्थन हासिल किया था।

चुनावी वादे बनाम वर्तमान कार्रवाई

2023 के घोषणापत्र में, भाजपा ने हसदेव अरण्य को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा था और पेड़ों की कटाई को भ्रष्टाचार से जोड़ा था। पार्टी ने पर्यावरण और आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा का संकल्प लिया था। इस मुद्दे को भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया था, जिससे यह संदेश गया कि वे हसदेव के जंगल और वहां रहने वाले लोगों के प्रति संवेदनशील हैं।

लेकिन अब, विष्णुदेव साय सरकार द्वारा जारी किया गया 5 लाख पेड़ों की कटाई का आदेश, पार्टी के पूर्व रुख से बिल्कुल अलग है। यह निर्णय न केवल पर्यावरणविदों और स्थानीय आदिवासियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह भाजपा की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।

पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर प्रभाव

हसदेव अरण्य छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है, जो अपनी घनी जैव विविधता और आदिवासी आबादी के लिए जाना जाता है। यहां पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई से न केवल पर्यावरण को irreparable क्षति होगी, बल्कि यह स्थानीय आदिवासी समुदायों के जीवन और आजीविका पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डालेगा, जो सदियों से इन जंगलों पर निर्भर हैं।

यह देखना होगा कि भाजपा सरकार इस विरोधाभास को कैसे संबोधित करती है और जनता व पर्यावरण कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया क्या होती है।

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