रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा और संवेदनशील सवाल चर्चा में है —
“क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के समधी के घर पर भी बुलडोजर चलाएगी?”
पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल पर कोयला घोटाला, शराब घोटाला और डीएफ फंड में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप हैं। बावजूद इसके, अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
वहीं, उनकी गौरीशंकर अग्रवाल से पारिवारिक नजदीकी के चलते अब भाजपा सरकार की नियत और निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक रिश्तों पर प्रशासनिक नरमी?
जहां भाजपा सरकार दूसरे मामलों में तेजी से बुलडोजर कार्रवाई कर रही है, वहीं रामगोपाल अग्रवाल जैसे प्रभावशाली व्यक्ति पर अब तक कोई सख्त प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया है।
इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि —
क्या विष्णुदेव सरकार के बुलडोजर की धार अपनों के सामने कुंद हो जाती है?
जनता की निगाहें सरकार की निष्पक्षता पर
अब आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कानून के राज को प्राथमिकता देंगे और “भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के समधी” के घर पर भी प्रशासनिक बुलडोजर चलाने का साहस दिखाएंगे?
या फिर ये मामला भी राजनीतिक रिश्तों की ढाल में दबा दिया जाएगा?



