छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में रेत के अवैध खनन और परिवहन का मामला फिर सुर्खियों में है। प्रशासनिक दावों के बावजूद राजिम क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन धड़ल्ले से जारी है। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है।
मुख्य घटनाक्रम:
राजिम क्षेत्र में माइनिंग विभाग द्वारा बनाए गए बैरियर को लेकर दावा किया जा रहा है कि वह अवैध परिवहन को रोकता है। परंतु हकीकत यह है कि रात 11 बजे के बाद 60 से अधिक हाइवा (रेत से भरे ट्रक) बेरोकटोक उस बैरियर से गुजरते हैं। पैरी नदी के कुर्रूस केरा घाट पर तीन से अधिक चैन माउंटेन मशीनें रातभर अवैध खनन करती हैं। इस प्रकार प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद माफिया निडर होकर रेत की निकासी कर रहे हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक पहलू:
जब पत्रकारों ने पिनतई बंद घाट पर अवैध खनन की सच्चाई उजागर करने की कोशिश की, तो उन पर जानलेवा हमला हुआ। इसके बाद जिला प्रशासन ने सभी रेत घाटों पर अवैध खनन और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का दावा किया। यहां तक कि राजिम विधायक रोहित साहू ने भी प्रशासन के दावों का समर्थन किया। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि कुर्रूस केरा घाट पर प्रतिदिन रात को खनन कार्य चल रहा है, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोलता है।



