23 जुलाई को सावन शिवरात्रि का पर्व, चार प्रहरों की पूजा से मिलेगा विशेष पुण्य

Madhya Bharat Desk
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श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ने वाली सावन शिवरात्रि इस वर्ष 23 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय होता है और इस माह की शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 23 जुलाई की सुबह 4:39 बजे प्रारंभ होकर 24 जुलाई को रात 2:28 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 23 जुलाई को ही रखा जाएगा।

सावन शिवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह रहता है। इस दिन शिवभक्त उपवास रखते हैं और रात्रि में चार प्रहरों में विशेष विधि से भगवान शिव की पूजा करते हैं। पूजा के दौरान जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया जाता है। प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग भोग, पुष्प और मंत्रों से शिव का पूजन होता है।

चार प्रहरों की पूजा का महत्व

मान्यता है कि रात के चारों पहर क्रमश: शरीर, मन, आत्मा और ब्रह्म को दर्शाते हैं। इन चार अवस्थाओं में शिव की उपासना से साधक को पूर्णता की प्राप्ति होती है। लिंग पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक चांडाल ने अनजाने में शिवरात्रि के दिन बेलपत्र अर्पित कर मोक्ष प्राप्त किया था, जिससे इस दिन की महत्ता स्पष्ट होती है।

पूजन विधि

प्रात: स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल, पंचामृत, बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन, सफेद फूल, धूप-दीप और फल अर्पित किए जाते हैं। ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप कर रात्रि भर जागरण व शिव कथा का श्रवण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

अग्नि पुराण में कहा गया है कि श्रावण मास में शिव की आराधना सर्वकामनाओं की पूर्ति करती है और निशीथ काल में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है।

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