रायपुर। कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “जो जैसा करेगा, वैसा पाएगा।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता CBI, ED और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों से डरते हैं क्योंकि उनके “कुकर्म” अब जनता के सामने आ चुके हैं। मूणत ने श्रीमद्भगवद गीता का संदर्भ देते हुए कहा, “कर्म करते जाइए, फल की चिंता मत करिए। अगर आपने गलत किया है तो आपको उसका परिणाम मिलेगा।”
राजनीतिक बदले की कार्रवाई या कानून का पालन?
इस मुद्दे पर दो धारणाएं सामने आती हैं —
1. यदि वाकई भ्रष्टाचार हुआ है और एजेंसियां तथ्यों के आधार पर काम कर रही हैं, तो कार्रवाई न्यायोचित है।
2. लेकिन अगर इन एजेंसियों का उपयोग केवल विरोधियों को डराने के लिए किया जा रहा है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
मूणत ने विपक्ष पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा, “जब एजेंसियों से जांच की मांग खुद कांग्रेस करती है, और वही एजेंसियां जब सबूतों के आधार पर कार्रवाई करती हैं, तो फिर उन्हें तकलीफ क्यों होती है?”
न्यायिक प्रक्रिया हो निष्पक्ष
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरोप और दोष सिद्ध होने के बीच बड़ा अंतर होता है। जब तक किसी पर लगे आरोप अदालत में साबित न हों, तब तक उन्हें दोषी नहीं कहा जा सकता। इसलिए किसी भी दल या नेता के विरुद्ध कार्रवाई निष्पक्ष, पारदर्शी और संवैधानिक तरीके से होनी चाहिए।



