Axiom-4 मिशन ने धरती पर सफल वापसी कर ली है, और इसके साथ ही भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रच दिया — वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुँचने वाले पहले भारतीय बने। 18 दिवसीय इस उड़ान में शुक्ला ने मौलिक वैज्ञानिक अनुसंधान किए और भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई ऊँचाई दी।
घोषणा से उड़ान तक
2024 के अंत में Axiom-4 की घोषणा हुई। यह मिशन इसरो, नासा और स्पेसएक्स के संयुक्त सहयोग का उदाहरण था। शुरुआती योजना 2025 की शुरुआती तिथियों में प्रक्षेपण की थी, लेकिन प्री-लॉन्च जाँच और फ़्लोरिडा के प्रतिकूल मौसम ने कार्यक्रम को कई बार टाल दिया।
लॉन्च की ऐतिहासिक घड़ी
आखिर 25 जून 2025 को केनेडी स्पेस सेंटर से फाल्कन-9 रॉकेट ने उड़ान भरी, और महज़ 24 घंटों बाद, 26 जून को क्रू ड्रैगन ‘ग्रेस’ ISS से जुड़ गया। उस पल से शुक्ला और उनके साथियों का अंतरिक्ष-अध्याय शुरू हुआ।
माइक्रोग्रैविटी में भारतीय प्रयोग
शुक्ला ने माइक्रोग्रैविटी में सात भारतीय प्रयोग पूरे किए। इनमें मूँग-मेथी अंकुरण, स्टेम-सेल व्यवहार, तथा माइक्रोएल्गी पर अध्ययन शामिल था। साथ ही, उन्होंने शून्य गुरुत्व में पानी के बुलबुले बनाकर सतह तनाव की दिलचस्प तस्वीरें साझा कीं और स्क्रीन-कार्य के दौरान Astronaut Cognitive Load मापा।
धरती से संवाद
मिशन के दौरान शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विद्यार्थियों तथा इसरो वैज्ञानिकों से रेडियो-वीडियो वार्ता की, जिससे लाखों लोगों को अंतरिक्ष विज्ञान की झलक मिली।
विदाई और वापसी
13 जुलाई को Expedition-73 दल ने क्रू को भावभीनी विदाई दी। 14 जुलाई को ड्रैगन ‘ग्रेस’ ने ISS से अलग होकर पुनःप्रवेश शुरू किया, और 15 जुलाई 2025 को कैलिफ़ॉर्निया तट के पास शांत जल में स्प्लैश-डाउन के साथ मिशन का पटाक्षेप हुआ।
यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष इतिहास में स्वर्णाक्षर जोड़ती है और भावी वाणिज्यिक अंतरिक्ष अभियानों के लिए द्वार खोलती है।






