डासना (उत्तर प्रदेश)। सावन का पावन महीना शुरू होते ही शिव भक्तों का जनसैलाब ऐतिहासिक शिव शक्ति धाम, डासना की ओर उमड़ने लगता है। यह मंदिर न सिर्फ अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा बल्कि अनोखी विशेषताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान शरण ली थी। मंदिर में स्थित शिवलिंग को पुरातत्व विभाग ने भी 5,200 साल पुराना बताया है।
दिल्ली-मेरठ एनएच-9 से डासना की ओर स्थित इस प्राचीन स्थल पर 108 किलोग्राम पारे से बना पारदेश्वरनाथ महादेव शिवलिंग और 109 अन्य शिवलिंग श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र हैं। यही नहीं, मंदिर की सबसे रहस्यमयी बात यह है कि यहां कोई भी छत स्थायी रूप से नहीं टिकती—हर बार दरारें आ जाती हैं।
यहां मां काली की मूर्ति भी कसौटी के पत्थर से बनी हुई है, जिसके दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। मंदिर परिसर में स्थित एक प्राचीन तालाब में स्नान करने से चर्म रोगों से मुक्ति मिलने की भी लोकधारणा है।
यति नरसिंहानंद गिरि महाराज पिछले दो दशकों से इस धाम के पीठाधीश्वर हैं। वे बताते हैं कि यह स्थल परशुरामजी की स्थापना से जुड़ा है और हर साल सावन में लाखों भक्त यहां पहुंचते हैं। मां चेतनानंद, जो इस मंदिर की प्रमुख महिला संत हैं, का कहना है कि सावन के प्रत्येक सोमवार और शिवरात्रि के दिन यहां विशाल श्रद्धालु-समूह दर्शन करने पहुंचता है।



