शिव नाडर : समाज की सेवा को दौलत से जोड़ने वाले प्रेरणास्त्रोत टेक्नोलॉजिस्ट

Madhya Bharat Desk
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“जो कुछ समाज से पाया है, उसे लौटाना मेरा धर्म है।” — शिव नाडर

शिव नाडर केवल एक सफल उद्योगपति नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी सोच के प्रतीक हैं जो तकनीक के ज़रिए समाज में बदलाव लाने का जज़्बा रखती है। उन्होंने धन को शक्ति नहीं, बल्कि समाज की सेवा का माध्यम बनाया है। भारत के सबसे बड़े दानवीरों में शामिल शिव नाडर ने अपनी मेहनत से जो कुछ हासिल किया, उसे समाज के जरूरतमंद वर्गों को समर्पित कर दिया।

गांव से लेकर वैश्विक मंच तक का सफर

1945 में तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में जन्मे शिव नाडर ने बेहद सामान्य शुरुआत से शुरुआत की। 1976 में उन्होंने HCL की स्थापना की, जिसने भारत में कंप्यूटर क्रांति को जन्म दिया। मात्र 20 लाख रुपए की पूंजी से शुरू हुई इस कंपनी ने 100 से अधिक देशों में भारत का नाम रोशन किया। शिव नाडर की सोच थी— तकनीक का लाभ सभी को मिलना चाहिए।

शिक्षा के ज़रिए बदलाव की नींव रखी

शिव नाडर फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने शिक्षा को बदलाव का माध्यम बनाया। शिव नाडर स्कूल, शिव नाडर यूनिवर्सिटी, विद्याज्ञान जैसे संस्थानों के ज़रिए उन्होंने हज़ारों छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर दिया। उनका मानना है कि शिक्षा ही समाज को जागरूक और आत्मनिर्भर बना सकती है।

HCL : आत्मनिर्भर भारत की मिसाल

शिव नाडर द्वारा स्थापित HCL भारत की पहली स्वदेशी कंप्यूटर कंपनी थी, जो आज 100 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रही है। कंपनी में 92% भारतीय कर्मचारी हैं। उन्होंने न सिर्फ तकनीक दी, बल्कि युवाओं को रोज़गार और नेतृत्व का अवसर भी प्रदान किया।

सबसे बड़ा दानवीर – आंकड़ों में ही नहीं, सोच में भी

हुरून रिपोर्ट 2024 के अनुसार, शिव नाडर ने 2023 में ₹2,153 करोड़ दान किए। यह भारत में सबसे अधिक दान देने वाला व्यक्ति बनाता है। कुल संपत्ति का लगभग 5.9% समाज कल्याण में लगाने का उनका साहस प्रेरणादायक है।

सम्मान और उदेश्य

2008 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से नवाज़ा। उन्हें फोर्ब्स ने दुनिया के शीर्ष परोपकारी व्यक्तियों में स्थान दिया है। लेकिन उनके लिए सम्मान से बड़ा उद्देश्य है— समाज पर सकारात्मक प्रभाव।

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