नई दिल्ली:
देशभर में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की तैयारी अब अंतिम चरण में है। चुनाव आयोग ने यह कवायद अगस्त 2025 से शुरू करने का संकेत दिया है। इस पहल को बिहार में चल रहे पुनरीक्षण अभियान के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि बिहार में इस प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट तक याचिका पहुँची थी। विपक्षी दलों ने मतदाता पुनरीक्षण को “संदिग्ध मंशा” करार देते हुए इस पर रोक की मांग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को संवैधानिक दायित्व बताते हुए इस प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी, हालांकि इसके समय और तरीके पर सवाल भी उठाए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कार्य केवल बिहार तक सीमित न रहे, बल्कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। इसके बाद चुनाव आयोग ने सभी राज्यों से उनके द्वारा आखिरी बार प्रकाशित मतदाता सूची की जानकारी मांगी है।
दिल्ली और उत्तराखंड जैसे राज्यों में अंतिम पुनरीक्षण वर्षों पहले हुआ था — दिल्ली में 2008 और उत्तराखंड में 2006 में। चुनाव आयोग अब इन राज्यों समेत पूरे देश में अद्यतन प्रक्रिया को लागू करने की तैयारी कर रहा है।
28 जुलाई 2025 के बाद होगा अंतिम निर्णय
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिहार पुनरीक्षण से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही देशव्यापी पुनरीक्षण का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस विशेष पुनरीक्षण का एक उद्देश्य मतदाता सूची से अवैध विदेशी नागरिकों को हटाना भी है, खासकर बांग्लादेश और म्यांमार से आए गैरकानूनी प्रवासियों की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करना।
2025-2026 के चुनावों की तैयारी:
बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, वहीं असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में 2026 में चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग की यह कार्रवाई इन राज्यों में भी अहम भूमिका निभाएगी।






