ये वीडियो कांकेर जिले का है। जो छत्तीसगढ़ राज्य की कड़वी सच्चाई को दिखाता है। बांसकुंड गांव के 3 आश्रित गांव में से दो ऊपर तोनका तथा नीचे तोनका में प्राथमिक शाला है।
यहाँ आज भी ग्रामीण कंधे पर चावल की बोरियां स्कूल के बच्चे बस्ता लेकर स्टापडेम 16 पिलरों को छलांग लगा लगाकर पार करते हैं।
राज्य में जहां पुल पुलियों और ब्रिज की आवश्यकता है, वहाँ सरकार पैसे खर्च नहीं करना चाहती, पर बिना मतलब के राज्य की राजधानी में स्काईवाक नाम का आठवां अजूबा खड़ा कर दिया जाता है।
राज्य की राजधानी में जहां हर 6 महीने में एक ब्रिज या पुल जाता मिल जाता है और दूसरी और राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में जनता ब्रिज या पुल के लिए संघर्ष करती रहती है।
सरकार को सोचने की जरूरत है कि जनता के टैक्स के पैसे को कहां खर्च करना है? सही जगह पर पैसे खर्च करके उस पैसे सही उपयोग करना है या गलत जगह पर खर्च करके फिजूल खर्ची करना है।



