नई दिल्ली।भले ही 2024 में सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में जबरदस्त उछाल दर्ज की गई हो, लेकिन कार्बन उत्सर्जन ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बना दिया है। एनर्जी इंस्टीट्यूट की ‘2025 स्टैटिस्टिकल रिव्यू ऑफ वर्ल्ड एनर्जी’ रिपोर्ट के अनुसार, बीते साल वैश्विक ऊर्जा की खपत 2% बढ़ी, जबकि कार्बन उत्सर्जन में भी 1% की वृद्धि देखी गई।
ऊर्जा खपत ऐतिहासिक स्तर पर
2024 में दुनिया की ऊर्जा मांग 592 एक्साजूल तक पहुंच गई, जो अब तक की सबसे ऊंची दर है। जीवाश्म ईंधन, परमाणु, जलविद्युत, और नवीकरणीय ऊर्जा – सभी स्रोतों का रिकॉर्ड स्तर पर उपयोग हुआ।
सौर और पवन ऊर्जा की 16% बढ़ोतरी भी नाकाफी
सौर और पवन ऊर्जा में 16% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज हुई, जिसमें चीन की 57% हिस्सेदारी रही। लेकिन यह तेजी कुल ऊर्जा खपत की बढ़ती रफ्तार को संतुलित नहीं कर सकी। बीते दो वर्षों में सौर ऊर्जा का उत्पादन लगभग दोगुना हुआ है, फिर भी यह कार्बन उत्सर्जन पर असर डालने में नाकाम रहा।
जीवाश्म ईंधन की पकड़ कायम
कोयला, गैस और तेल का उपयोग भी 2024 में 1% बढ़ा। भारत में कोयले की मांग 4% बढ़ी, जो अमेरिका, यूरोप और दक्षिण अमेरिका की कुल मांग के बराबर है। हालांकि चीन में तेल की मांग में 1.2% की गिरावट दर्ज की गई।
बिजली की खपत में 4% की तेज उछाल
रिपोर्ट बताती है कि 2024 में वैश्विक बिजली मांग में 4% की बढ़ोतरी हुई है, जो इस बात का संकेत है कि हम ऊर्जा केंद्रित युग में प्रवेश कर चुके हैं। हालांकि यह बदलाव असंतुलित है – स्वच्छ और पारंपरिक दोनों ऊर्जा स्रोत एकसाथ तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
असमान और असंतुलित बदलाव
यूरोप में अक्षय ऊर्जा की वृद्धि सप्लाई चेन लागत के चलते धीमी रही, जबकि भारत और चीन जैसे देश अब भी तीव्र विकास की दौड़ में हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अब भी 60% नई ऊर्जा मांग जीवाश्म ईंधनों से पूरी हो रही है, जो चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों की चेतावनी:
एनर्जी इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष एंडी ब्राउन और केपीएमजी यूके की ऊर्जा रणनीतिकार वफा जाफरी ने कहा कि COP28 में तय किए गए लक्ष्य – जैसे 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा को तीन गुना करना – फिलहाल ब्याज दरों और लागत के बोझ के कारण मुश्किल दिख रहा है।



