ईरान और इजरायल के बीच की लड़ाई भले ही थम चुकी हो, लेकिन दोनों देशों के बयानों से यह स्पष्ट है कि अंदर ही अंदर बदले की आग अब भी धधक रही है। हाल ही में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उसके हमलों से कुछ भी हासिल नहीं हुआ, उल्टा उसे खुद शर्मिंदगी उठानी पड़ी।
वहीं दूसरी ओर, इजरायली सेना (IDF) ने अपने ऑपरेशन ‘राइजिंग लॉयन’ को अब तक का सबसे बड़ा जवाबी हमला बताया है। इस ऑपरेशन में इजरायल ने दावा किया है कि उसने 12 दिनों के भीतर ईरान के 900 से ज्यादा सामरिक ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। साथ ही, 11 ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों और 30 वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों को भी निशाना बनाया गया, जिनमें 3 टॉप कमांडर शामिल थे।
ईरान के मिसाइल अड्डे और उत्पादन इकाइयाँ नेस्तनाबूद
IDF के मुताबिक इस ऑपरेशन में 200 से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर तबाह किए गए, जो ईरान के मिसाइल बेड़े का लगभग आधा हिस्सा है। इसके अलावा, विमान और मिसाइल निर्माण से जुड़े कई केंद्र भी पूरी तरह बर्बाद कर दिए गए जिससे ईरान की रक्षा उत्पादन प्रणाली को गहरा झटका लगा है।
खामेनेई का सुराग नहीं मिला, वरना मार गिराते: इजरायली रक्षा मंत्री
इजरायली रक्षा मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर ऑपरेशन के दौरान खामेनेई तक पहुंच बना पाते, तो वे उन्हें खत्म कर देते। उन्होंने कहा कि यह एक सुनहरा मौका होता, जो दुर्भाग्य से हाथ नहीं लगा।
अमेरिका की एंट्री और फिर ईरानी पलटवार
इस 12 दिवसीय संघर्ष के अंतिम चरण में अमेरिका भी खुलकर मैदान में उतरा और 22 जून को बंकर बस्टर बमों से ईरान के तीन परमाणु अड्डों पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने कतर और इराक में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल बरसाए।



