छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में महिला पटवारी को ब्लैकमेल करने के मामले में गिरफ्तार आरोपी हसन आबिदी के खुलासों से सियासत और पुलिस प्रशासन में हलचल मच गई है। आरोप है कि हसन अपने प्रभाव और बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें दिखाकर राजस्व विभाग के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को डराता था, और ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूलता था।
हसन की गिरफ्तारी तब हुई जब पटवारी सरिता सोनी और उनके पति राजेश सोनी ने 6 जून को पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। रिपोर्ट के अनुसार, हसन द्वारा लंबे समय से उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा था और पैसे की मांग की जा रही थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए हसन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
लेकिन इस मामले ने एक नया मोड़ तब लिया जब सोशल मीडिया पर हसन की कुछ वायरल चैट्स और ट्वीट्स सामने आए, जिनमें वह खुद को डीएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी से जुड़ा हुआ बता रहा था। यह दावा सिर्फ डराने के लिए था या उसके पीछे सच में कोई रसूखदार कनेक्शन था—इसकी जांच अब प्राथमिकता बन गई है।
हसन की पुरानी तस्वीरें कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं के साथ भी सामने आई हैं, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है। अब यह सिर्फ ब्लैकमेलिंग का नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और पुलिस के भीतर मिलीभगत का भी मामला बनता नजर आ रहा है।



