नई दिल्ली। संसद की गरिमा और राजनीतिक मर्यादाओं को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज नोटिस) भेजा है।
वेणुगोपाल ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि 18 अप्रैल 2026 को राष्ट्र के नाम दिए गए संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोकसभा के सांसदों को लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं, जो न सिर्फ आपत्तिजनक थीं बल्कि संसद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाने वाली हैं। उनका कहना है कि इस तरह के बयान सांसदों के अधिकारों और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ हैं।
दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय का है जब लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पारित नहीं हो सका था। कांग्रेस का आरोप है कि इसके बाद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी सांसदों के इरादों और उनके मतदान के तरीके पर सवाल उठाए, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
वेणुगोपाल ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी एक नेता या पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे संसद और लोकतंत्र की गरिमा से जुड़ा हुआ है। अगर ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो भविष्य में यह एक खतरनाक परंपरा बन सकती है।
इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्थापित संसदीय परंपराओं के खिलाफ था और इसमें विपक्ष पर राजनीतिक निशाना साधा गया।
अब इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह विवाद सीधे तौर पर संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है।



