सिंगरौली में शिक्षा घोटाले का खुलासा: स्कूलों के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट

Madhya Bharat Desk
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मध्य प्रदेश के सिंगरौली से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन स्कूलों में बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव रखी जानी थी, वहीं अब करोड़ों रुपये के घोटाले की कहानी सामने आ रही है।

लोकायुक्त की कार्रवाई में पता चला है कि सरकारी स्कूलों के नाम पर खर्च दिखाकर बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं। आंकड़े चौंकाने वाले हैं 558 स्कूलों के लिए सफाई सामग्री पर करीब 97 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे मेल नहीं खाती।

इसके अलावा, सिर्फ 19 स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी (VR) लैब के नाम पर करीब 4.68 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए। सवाल ये उठ रहा है कि क्या इन स्कूलों में वास्तव में ऐसी सुविधाएं मौजूद हैं या सिर्फ कागजों में ही सब कुछ पूरा कर दिया गया।

यही नहीं, 61 स्कूलों में बिजली फिटिंग और मरम्मत के नाम पर भी 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च दर्शाई गई। जांच में यह भी सामने आया है कि इन सभी कार्यों में टेंडर प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा हो गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारी सूर्यभान सिंह समेत कई अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की है। साथ ही, संबंधित कार्यालयों से दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं और अब हर भुगतान, हर बिल और हर ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है।

इस खुलासे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सिर्फ कागजों तक सीमित है? अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जांच आगे किन बड़े नामों को उजागर करती है और क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो पाएगी।

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