रायपुर/सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता पावर प्लांट हादसे ने एक और परिवार की दुनिया उजाड़ दी। मध्यप्रदेश के रहने वाले मजदूर किस्मत अली, जो गंभीर रूप से झुलसने के बाद रायपुर के एक निजी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, आखिरकार हार गए। उनकी मौत के साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है।
इस हादसे में अब तक 36 मजदूर झुलस चुके हैं, जिनमें से कई की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। अस्पतालों में भर्ती इन मजदूरों के परिजन हर पल दहशत और उम्मीद के बीच झूल रहे हैं।
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और डभरा थाने में वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत प्रबंधन के 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
जांच में जो बातें सामने आई हैं, वो बेहद चिंताजनक हैं। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, प्लांट में उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। बताया जा रहा है कि बॉयलर में तकनीकी खामियों को लेकर पहले से चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद काम नहीं रोका गया। मशीनों के रखरखाव और संचालन में भी गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसने इस हादसे को और भयावह बना दिया।
हादसे के 24 घंटे बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की, जिसमें प्रबंधन की लापरवाही साफ तौर पर सामने आई है।
अब सवाल सिर्फ जिम्मेदारी तय करने का नहीं, बल्कि उन परिवारों के दर्द का है जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया। यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।



