रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे प्रदेश में अस्मिता और अधिकारों के मुद्दे को लेकर सक्रिय रहते हैं। 16 अप्रैल को रायपुर के छत्तीसगढ़ी भवन में आयोजित होने वाली अहम बैठक में उनकी उपस्थिति खास मायने रखती है, जहां “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा” के तीसरे चरण की रणनीति तैयार की जाएगी।
अनिल दुबे लंबे समय से छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के अधिकार, पहचान और स्वाभिमान के सवाल उठाते रहे हैं। उनके नेतृत्व में कई बार ऐसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है, जिन्हें आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस बैठक को भी उसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इस बार की चर्चा में खास तौर पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भूमि से जुड़े विवाद, आदिवासी जमीनों की सुरक्षा और बाहरी हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर फोकस रहेगा। इन मुद्दों को लेकर आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए रथ यात्रा के तीसरे चरण को और प्रभावी बनाने की योजना है।
बैठक में सामाजिक कार्यकर्ताओं, आंदोलन से जुड़े लोगों और विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। माना जा रहा है कि अनिल दुबे के मार्गदर्शन में आंदोलन को एक नई दिशा और मजबूती मिल सकती है।
छत्तीसगढ़ में अस्मिता और अधिकारों की यह लड़ाई अब केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय बनती जा रही है, और आने वाले समय में इसका असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है।



