छत्तीसगढ़ कांग्रेस में जिला कार्यकारिणी की सूची रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल प्रदेश प्रभारी की भूमिका को लेकर खड़ा हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सूची जारी होने के महज़ दो घंटे के भीतर उसे निरस्त कर दिया, लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यही चुप्पी अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सूची निरस्त करने से पहले प्रभारी से सहमति ली गई थी, या फिर यह निर्णय एकतरफा लिया गया? यदि यह निर्णय एकतरफा लिया गया तो क्या प्रदेश अध्यक्ष पर प्रदेश प्रभारी कोई कार्यवाही करेगी?
पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि प्रभारी का काम संगठन में सामंजस्य बनाना होता है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सचिन पायलट पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि मानो उन्हें इस फैसले की जानकारी तक न हो।
इस विवाद ने ‘संगठन सृजन’ अभियान की मंशा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेतृत्व राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने जिला अध्यक्षों को संगठनात्मक अधिकार देने की बात कही थी, लेकिन सूची रद्द होने के फैसले को उसी अधिकार का हनन माना जा रहा है।
फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है क्या यह फैसला सामूहिक था या व्यक्तिगत? और प्रभारी की चुप्पी आखिर किस ओर इशारा कर रही है?







