छत्तीसगढ़ आबकारी घोटाला: सौम्या चौरसिया व केके श्रीवास्तव को जमानत पर जेल से रिहाई

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित आबकारी घोटाले में निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया और तांत्रिक केके श्रीवास्तव जमानत पर रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। ईओडब्लू द्वारा 1500 पेज का आठवां पूरक चालान पेश होने के बाद बुधवार को दोनों को हाईकोर्ट के निर्देश पर राहत मिली।

घोटाले की शुरुआती जांच में 2000 करोड़ का नुकसान आंका गया, जो अब 3100 करोड़ तक पहुंच चुका है। आरोप है कि नकली होलोग्राम लगाकर बिना एक्साइज ड्यूटी चुकाए सरकारी शराब दुकानों से अवैध बिक्री हुई, जिससे शासन को भारी क्षति पहुंची। ईडी ने ईसीआईआर दर्ज की, उसके बाद ईओडब्लू ने प्रकरण कायम किया। अब तक 51 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश हो चुके हैं।

सौम्या चौरसिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रह चुकी हैं। उन्होंने ईओडब्लू कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिकाएं दायर कीं। सुप्रीम कोर्ट ने मामला हाईकोर्ट भेजा, जहां 28 फरवरी को सशर्त जमानत मिली—चालान पेश होने पर ही रिहाई, ताकि जांच प्रभावित न हो। चालान में सौम्या, केके श्रीवास्तव और राजीव भवन के अकाउंटेंट देवेंद्र डड़सेना की भूमिका बताई गई।

ईओडब्लू के चालान के अनुसार, केके श्रीवास्तव ने सिंडिकेट के अवैध उगाही तंत्र में सक्रिय भूमिका निभाई—नकद उठाव, परिवहन, निवेश और प्रभाव दुरुपयोग कर अवैध धन अर्जित किया। सौम्या ने अपने पद का दुरुपयोग कर सिंडिकेट को संरक्षण, समन्वय और प्रशासकीय सुविधा प्रदान की, जिससे राजस्व को अपूरणीय नुकसान हुआ।

जेल से बाहर आते ही केके श्रीवास्तव ने सफाई दी कि वे तांत्रिक नहीं, बल्कि कुंभ मेले से दाढ़ी-बाल बढ़ाकर पूजा-पाठ कर रहे हैं। पूर्व सीएम भूपेश बघेल और मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा से उनके निजी संबंध हैं, न कि पार्टी आधारित। उन्होंने कहा, “कोई गलती नहीं की, अदालत में विचाराधीन है।” सौम्या पहले सशर्त जमानत पर राज्य से बाहर रहीं, पूछताछ के दौरान गिरफ्तार हुईं।

मामला अब ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है। वकीलों का कहना है कि राजनीतिक षड्यंत्र के तहत केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने एक ही मामले में दोहराई गिरफ्तारियां कीं। आगे पूरक चालान की संभावना बनी हुई है।

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