नए वित्त वर्ष में गैस, टोल, कार और टैक्स नियम बदले, आम आदमी पर बढ़ा बोझ

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही देशभर में कई अहम बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाला है। इस बार महंगाई ने एक साथ कई मोर्चों पर चोट की है—रसोई, सफर, वाहन और बैंकिंग तक।

सबसे पहले बात रसोई की करें तो सरकारी तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में ₹200 से ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी है। राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत अब ₹2078.50 तक पहुंच गई है, जबकि चेन्नई में यह ₹2246.50 हो गई है। इसका असर होटल और रेस्टोरेंट के खाने पर साफ दिख सकता है, क्योंकि लागत बढ़ने से कीमतें बढ़ना तय माना जा रहा है। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत फिलहाल जस की तस है, जिससे आम घरों को थोड़ी राहत जरूर मिली है।

सफर करने वालों के लिए भी नियम सख्त हुए हैं। अब ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तक ही टिकट कैंसिल कराने पर रिफंड मिलेगा, जबकि पहले यह सीमा 4 घंटे थी। हालांकि एक राहत यह दी गई है कि यात्री ट्रेन छूटने से आधा घंटा पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं।

हाईवे पर चलने वालों के लिए भी बदलाव बड़ा है। अब देशभर के टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यानी अब टोल टैक्स चुकाने के लिए FASTag या UPI का इस्तेमाल करना ही होगा। इसके साथ ही FASTag का सालाना पास भी महंगा हो गया है। वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को भी झटका लगा है, क्योंकि 1 अप्रैल से कारों की कीमतों में 2 से 3 फीसदी तक की बढ़ोतरी लागू हो गई है।

टैक्स और बैंकिंग सेक्टर में भी कई बदलाव देखने को मिले हैं। अब ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’ शब्द इस्तेमाल किया जाएगा। नई टैक्स व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स छूट का प्रावधान लागू किया गया है। TDS से जुड़े फॉर्म 16 और 16A के नाम बदलकर क्रमशः फॉर्म 130 और 131 कर दिए गए हैं। HRA छूट लेने के लिए अब किराया रसीद के साथ मकान मालिक का PAN देना अनिवार्य होगा। वहीं, पंजाब नेशनल बैंक ने एटीएम से नकद निकासी की सीमा तय कर दी है—क्लासिक डेबिट कार्ड से ₹25,000 और प्लैटिनम कार्ड से ₹50,000 प्रतिदिन।

नौकरीपेशा लोगों के लिए भी नए नियम लागू हुए हैं। लेबर कोड के तहत अब बेसिक सैलरी को CTC का कम से कम 50% रखना जरूरी होगा। इससे हाथ में मिलने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन PF और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी होगी। साथ ही नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की बात है कि अब फुल एंड फाइनल सेटलमेंट सिर्फ 2 कार्य दिवस में करना अनिवार्य कर दिया गया है, जो पहले 90 दिन तक खिंच जाता था।

इसके अलावा शेयर बाजार में F&O ट्रेडिंग महंगी हो गई है क्योंकि STT बढ़ा दिया गया है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से जुड़े टैक्स नियमों में भी बदलाव हुआ है। वहीं PAN कार्ड में जन्मतिथि सत्यापन के लिए अब आधार को मान्य नहीं माना जाएगा, इसके लिए अन्य दस्तावेज देना जरूरी होगा।

कुल मिलाकर, नए वित्त वर्ष की शुरुआत आम आदमी के लिए राहत से ज्यादा चुनौतियां लेकर आई है, जहां एक ओर खर्च बढ़ा है, वहीं नियमों की सख्ती भी महसूस की जाएगी।

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