पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। दरअसल, 16 मार्च को उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया था और नियमों के अनुसार 14 दिनों के भीतर एक पद छोड़ना अनिवार्य था—जिसकी समयसीमा आज समाप्त हो रही थी।
अब सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो बिहार में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत तय मानी जा रही है।
साल 2005 से अब तक राज्य की सत्ता में NDA गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी (BJP) हमेशा सहयोगी भूमिका में रही है, लेकिन अब पहली बार पार्टी को नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
नीतीश कुमार का राज्यसभा कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होगा। इससे पहले ही नए मुख्यमंत्री के चयन और सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।
CM रेस में आगे सम्राट चौधरी
फिलहाल किसी भी पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अंदरखाने से मिल रहे संकेतों के अनुसार BJP इस बार मुख्यमंत्री पद अपने पास रख सकती है।
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी इस रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। 2017 में BJP में शामिल होने के बाद उन्होंने तेजी से संगठन में अपनी पकड़ मजबूत की है। साथ ही, कुशवाहा समुदाय के एक प्रभावशाली नेता के रूप में उनका उभार भी उनकी दावेदारी को मजबूत बनाता है।
नित्यानंद राय भी विकल्प
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। बिहार की राजनीति में OBC चेहरे को प्राथमिकता मिलने के चलते उनका नाम भी चर्चा में है।
हालांकि वे यादव समुदाय से आते हैं, जो पारंपरिक रूप से RJD का वोट बैंक माना जाता है, लेकिन BJP इसे अपने पक्ष में एक नए समीकरण के रूप में देख सकती है।
क्या होगा आगे?
BJP का नेतृत्व अक्सर चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाना जाता है। ऐसे में जब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अटकलों का दौर जारी रहना तय है।







