रायपुर।होली के बाद एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति और किसान आंदोलन में हलचल तेज हो गई है। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथयात्रा” को दोबारा शुरू किया गया है। शनिवार को यह रथयात्रा गोसिया गांव से प्रारंभ होकर आसपास के कई गांवों में पहुंची, जहां ग्रामीणों और किसानों ने इसका गर्मजोशी से स्वागत किया।
रथयात्रा गोसिया से निकलकर पेंद्री, उलट, बगदेही, मोहतरा, झिरौनी, जिल्दा, धरमपुरा और मानिचौरी सहित कई गांवों में पहुंची। जैसे ही रथ गांवों में पहुंचा, स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने जयकारों और नारों के साथ इसका स्वागत किया। इस दौरान पूरे इलाके में “छत्तीसगढ़ी महतारी की जय” और “सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज जिंदाबाद” जैसे नारे गूंजते रहे।
यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ी महतारी की वंदना गीत और लोकगायक लक्ष्मण मस्तूरिया के जागरण गीतों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई। आयोजकों का दावा है कि कार्यक्रम से प्रभावित होकर कई गांवों के किसान, युवा और महिलाओं ने बड़ी संख्या में संगठन की सदस्यता भी ग्रहण की।
गांवों में आयोजित सभाओं को कवर्धा जिले के किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष महेंद्र कौशिक, रथयात्रा प्रभारी लालाराम वर्मा और गणेशराम कौशिक ने संबोधित किया।
महेंद्र कौशिक ने कहा कि किसानों की समस्याओं और छत्तीसगढ़ियों के साथ हो रहे कथित शोषण के मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन से जुड़े लोग इन मुद्दों पर लगातार संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।

वहीं रथयात्रा प्रभारी लालाराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि महासमुंद जिले में छत्तीसगढ़ी महतारी की प्रतिमा को तुमगांव थाना में रखने की घटना से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस रथयात्रा के माध्यम से संगठन ग्रामीण इलाकों में जाकर किसानों और आम लोगों से संवाद कर रहा है और अपने मुद्दों को लेकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।



