पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों में आई बाधाओं के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी राहत दी है। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी है। यह फैसला उस समय लिया गया है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात बिगड़ने के कारण समुद्री तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
क्या बोले अमेरिकी वित्त सचिव
फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संकट का असर समुद्री व्यापार पर पड़ा है। खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
उन्होंने बताया कि भारत पहले रूसी तेल की खरीद कम कर चुका था, लेकिन मौजूदा हालात में वैश्विक तेल सप्लाई में आई अस्थायी कमी को पूरा करने के लिए यह सीमित छूट दी गई है। बेसेंट के मुताबिक यह फैसला अस्थायी है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा, क्योंकि यह केवल समुद्र में पहले से मौजूद तेल के लेनदेन से जुड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिका का एक अहम रणनीतिक साझेदार है और अमेरिका को उम्मीद है कि भारत भविष्य में उससे तेल की खरीद बढ़ाएगा।
ईरान संकट का असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े हालातों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है, जिसमें से बड़ी मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है।
भारत की ऊर्जा स्थिति मजबूत
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार मौजूदा हालात को देखते हुए दिन में दो बार ऊर्जा स्थिति की समीक्षा कर रही है। देश के पास फिलहाल पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और उसकी नियमित आपूर्ति भी जारी है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। सरकार नागरिकों को सस्ता और स्थायी ईंधन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
रूस से तेल आयात में बढ़ोतरी
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। साल 2022 में रूस से भारत का तेल आयात महज 0.2 प्रतिशत था, जो अब तेजी से बढ़ा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में भारत ने अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 20 प्रतिशत रूस से आयात किया। यह मात्रा लगभग 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन के बराबर है।
वैश्विक कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि इस 30 दिन की छूट का मुख्य उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखना है। उनके अनुसार दक्षिण एशिया के समुद्री क्षेत्रों में टैंकरों में बड़ी मात्रा में रूसी तेल मौजूद है, जिसे जल्द बाजार में लाने से आपूर्ति की रुकावटें कम हो सकती हैं।







