बोर्ड ऑफ पीस से पहले यूएन में कूटनीतिक घमासान

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में एक बार फिर पश्चिम एशिया का संकट आ खड़ा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित “बोर्ड ऑफ पीस” की अहम बैठक से ठीक एक दिन पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में गाजा और वेस्ट बैंक को लेकर तीखी बहस हुई।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बुधवार को हुई इस बैठक में गाजा में जारी संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने की मांग उठी। साथ ही, वेस्ट बैंक में इस्राइल द्वारा कथित रूप से अपने नियंत्रण के विस्तार की कोशिशों की कई देशों ने कड़ी आलोचना की। परिषद के सदस्यों ने साफ कहा कि ऐसी कोई भी कार्रवाई “टू-स्टेट सॉल्यूशन” की संभावना को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की इस बैठक को पहले गुरुवार को आयोजित किया जाना था, लेकिन बोर्ड ऑफ पीस की प्रस्तावित बैठक को देखते हुए इसे एक दिन पहले कर दिया गया।

दिलचस्प बात यह रही कि परिषद के सदस्य देशों में से पाकिस्तान ही ऐसा देश है जिसने बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में भाग लेने का निमंत्रण स्वीकार किया है।

बैठक के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इस्राइल की हालिया कार्रवाइयों को “गैर-कानूनी और चिंताजनक” बताते हुए कहा कि वेस्ट बैंक में नियंत्रण बढ़ाने के फैसले अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल सकते हैं।

सत्र में ब्रिटेन, जॉर्डन, मिस्र और इंडोनेशिया के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी। कई अरब देशों ने पहले ही अपील की थी कि बोर्ड ऑफ पीस से पहले सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा की जाए, ताकि वैश्विक समुदाय एक स्पष्ट संदेश दे सके।

फलस्तीन के स्थायी प्रतिनिधि रियाद मंसूर ने कहा कि जमीन पर कब्जा संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कदम गाजा में चल रही शांति प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है।

वहीं इस्राइल की ओर से विदेश मंत्री गिदोन सार ने सुरक्षा परिषद पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिषद में इस्राइल के खिलाफ पूर्वाग्रह दिखता है और बाइबिल की धरती पर इस्राइल का अधिकार ऐतिहासिक और वैध है।

गिदोन सार ने यह भी तंज कसा कि इस समय पूरी दुनिया की नजरें बोर्ड ऑफ पीस पर टिकी हैं, जबकि सुरक्षा परिषद की चर्चा को अपेक्षित ध्यान नहीं मिल रहा।

कुल मिलाकर, बोर्ड ऑफ पीस की बैठक से पहले हुई यह कूटनीतिक कवायद इस बात का संकेत है कि गाजा और वेस्ट बैंक का मुद्दा अभी भी वैश्विक राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। अब देखना होगा कि आगामी बैठक क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में कोई ठोस पहल कर पाती है या नहीं।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment