मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा दिन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक सांकेतिक और भावनात्मक सवाल ने पूरे सदन का तापमान बढ़ा दिया। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने अशासकीय संकल्प के माध्यम से गाय को ‘राष्ट्र पशु’ घोषित करने की मांग रखकर सियासी बहस को नया मोड़ दे दिया।
सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की समस्या को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। लेकिन सदन के भीतर असली राजनीतिक हलचल तब दिखी, जब आतिफ अकील ने गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने का प्रस्ताव सामने रखा।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में गाय को ‘माता’ का दर्जा प्राप्त है और उसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए उसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। विधायक ने यह भी सुझाव दिया कि गाय की मृत्यु के बाद उसका सम्मानजनक अंतिम संस्कार हो तथा चमड़ा उद्योग पर रोक लगाने जैसे विषयों पर भी गंभीर विचार होना चाहिए।
आतिफ अकील ने याद दिलाया कि वर्ष 2017 में उनके पिता ने भी ऐसा ही प्रस्ताव रखा था, लेकिन पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण वह पारित नहीं हो पाया था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि गाय के मुद्दे पर भाजपा की कथनी और करनी में फर्क नजर आता है।
वहीं भाजपा की ओर से इस मांग पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने इसे ‘सिर्फ चर्चा में बने रहने की कोशिश’ करार दिया। उनका कहना था कि राज्य सरकार पहले से ही गौवंश संरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध है और अवैध कटान पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
गौरतलब है कि वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय पशु बंगाल टाइगर है, जिसे वन्यजीव संरक्षण के प्रतीक के रूप में यह दर्जा मिला हुआ है। ऐसे में गाय को राष्ट्र पशु घोषित करने की मांग न केवल सांस्कृतिक बल्कि संवैधानिक और पर्यावरणीय बहस को भी जन्म दे सकती है।
बजट सत्र के बीच उठी इस मांग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर मुद्दों की दिशा सिर्फ आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहने वाली। अब सबकी निगाह इस पर टिकी है कि यह प्रस्ताव आगे किस राजनीतिक मोड़ पर पहुंचता है।



