नई दिल्ली: लोकसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सियासी तापमान अचानक बढ़ गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस समझौते को “थोक में आत्मसमर्पण” करार देते हुए कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय हितों को कमजोर किया है।
सदन में बोलते हुए राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि अमेरिका यह तय करने लगे कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा या किन शर्तों पर व्यापार करेगा, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि खुद सरकार मानती है कि दुनिया में ऊर्जा और वित्तीय तंत्र का “हथियार की तरह इस्तेमाल” (Weaponization) हो रहा है, तो फिर ऐसे माहौल में भारत को कमजोर स्थिति में क्यों रखा जा रहा है?
राहुल गांधी ने आशंका जताई कि इस डील के बाद टैरिफ व्यवस्था और आयात-निर्यात संतुलन भारत के खिलाफ जा सकता है। उनके अनुसार कृषि, टेक्सटाइल और डिजिटल सेक्टर पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों को अत्याधुनिक और मशीनीकृत अमेरिकी कृषि से प्रतिस्पर्धा के लिए छोड़ दिया गया है, जो असमान मुकाबला है।
डिजिटल डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज डेटा नई संपत्ति है और एआई का “ईंधन” है। ऐसे में डेटा संप्रभुता पर समझौता भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि INDIA गठबंधन इस तरह की बातचीत करता, तो वह बराबरी की शर्तों पर समझौता सुनिश्चित करता और ऊर्जा सुरक्षा, किसान हित और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता।
सदन में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने वैश्विक भू-राजनीतिक हालात का भी उल्लेख किया। वहीं, एपस्टीन से जुड़े एक संदर्भ पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि बिना ठोस आधार के बयान दिए जा रहे हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से इस पर विस्तृत जवाब आना अभी बाकी है, लेकिन साफ है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब संसद और सियासत दोनों के केंद्र में आ गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।







