गिनती के डॉक्टरों के भरोसे खुलेगा बस्तर का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मेडिकल टूरिज्म के दावे पर उठे सवाल

Madhya Bharat Desk
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रायपुर/जगदलपुर।छत्तीसगढ़ में मेडिकल टूरिज्म को लेकर सरकार के दावों के बीच बस्तर संभाग के इकलौते सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की हकीकत सामने आ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अत्याधुनिक अस्पताल को अब गिनती के डॉक्टरों के सहारे और केवल ओपीडी सेवाओं के साथ शुरू करने की तैयारी है।

गौरतलब है कि छह दिन पहले ही स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी ने दावा किया था कि अब दूसरे राज्यों के लोग भी छत्तीसगढ़ में इलाज के लिए आ रहे हैं और राज्य मेडिकल टूरिज्म का हब बन रहा है। लेकिन बस्तर जैसे आदिवासी और संवेदनशील क्षेत्र में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की यह अधूरी शुरुआत, इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, बस्तर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी हैदराबाद के निजी संस्थान कांटिनेंटल हॉस्पिटल को सौंपी गई है। हालांकि अस्पताल में अब तक पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। यही वजह है कि पहले चरण में केवल न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की ओपीडी शुरू की जा रही है।

जबकि इस अस्पताल का उद्देश्य हृदय रोग, किडनी, कैंसर, न्यूरो, गैस्ट्रो समेत गंभीर और जटिल बीमारियों का इलाज बस्तर में ही उपलब्ध कराना था, ताकि मरीजों को रायपुर, विशाखापट्टनम या हैदराबाद का रुख न करना पड़े। मौजूदा हालात में मरीजों को जांच और परामर्श के बाद भी बड़े इलाज के लिए बाहर रेफर किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में यह अस्पताल उम्मीद की किरण बनकर आया था। गरीब और दूर-दराज के मरीजों को यहां बेहतर इलाज मिलने की आस थी, लेकिन सीमित ओपीडी के साथ शुरुआत से लोगों की उम्मीदों को झटका लग सकता है।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल ओपीडी शुरू कर अस्पताल को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण रूप से संचालित करने की योजना है।

 पूरी क्षमता से शुरू नहीं हुआ तो होगा विरोध

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी सरकार और प्रबंधन को घेरना शुरू कर दिया है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को पूरी क्षमता के साथ शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के निर्माण और संचालन में सरकारी धन लगाया गया है, ऐसे में बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के अस्पताल शुरू करना जनता के साथ धोखा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अस्पताल को विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना शुरू किया गया, तो यह केवल एक रेफरल सेंटर बनकर रह जाएगा और इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि यह अस्पताल बस्तर की उम्मीदों से जुड़ा है, न कि केवल उद्घाटन की औपचारिकता।

 प्रबंधन की सफाई

वहीं, कांटिनेंटल हॉस्पिटल प्रबंधन से जब अस्पताल की शुरुआत, डॉक्टरों की उपलब्धता और सेवाओं को लेकर जानकारी मांगी गई, तो किसी भी अधिकारी ने अधिकृत बयान देने से इनकार कर दिया। प्रबंधन की ओर से सिर्फ इतना कहा गया कि मशीनों, ऑपरेशन थिएटर और अन्य संसाधनों की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही अस्पताल शुरू किया जाएगा।

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