छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने फिलहाल इस मामले में कोई अंतरिम या अंतिम आदेश जारी नहीं किया है और अगली सुनवाई की तारीख 20 जनवरी तय की है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जमानत याचिका में उठाए गए तमाम तथ्यों और तर्कों पर विस्तृत विचार अंतिम सुनवाई के समय किया जाएगा। पीठ ने संकेत दिया कि प्रकरण की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए जल्दबाजी में कोई निर्णय उचित नहीं होगा।
राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने जमानत पर त्वरित राहत दिए जाने का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और इसमें मंत्रियों, राजनीतिक व्यक्तियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की कथित भूमिका सामने आई है। जेठमलानी ने यह भी कहा कि इस कथित घोटाले से राज्य के राजस्व को भारी क्षति पहुंची है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पर करीब 64 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में लेने का आरोप है। इसमें से लगभग 4.6 करोड़ रुपये राजनीतिक गतिविधियों पर और करीब 10 करोड़ रुपये निजी संपत्तियों के निर्माण में खर्च किए जाने की बात कही गई है, जिनमें स्वयं और उनके पुत्र के आवास शामिल बताए गए हैं।
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि साहू समेत कुछ अन्य अधिकारियों पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया अधिक गंभीर प्रतीत होते हैं। वहीं, कवासी लखमा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 1,100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और मामले में छह आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अब इस बहुचर्चित मामले में अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।







