रायपुर।छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था में एक और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। कवर्धा और महासमुंद में पहले सामने आए करीब 12 करोड़ रुपये के मामले के बाद अब प्रदेश के 14 जिलों में 22 करोड़ रुपये से अधिक की धान हेराफेरी पकड़ी गई है। जांच में सामने आया है कि राइस मिलर्स ने अपनी तय क्षमता से कहीं अधिक धान उठाकर उसे दोबारा समितियों में बेच दिया और बोनस की रकम आपस में बांट ली।
धान खरीदी केंद्रों और राइस मिलर्स की मिलीभगत से 71,550 क्विंटल धान का गबन किया गया। इस पूरे खेल में 795 ट्रकों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें से कई ट्रकों की एंट्री एक ही समय पर दो से पांच बार दर्ज की गई। मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं मुंगेली जिले में 4 राइस मिलों को सील कर दिया गया है।
AI जांच से खुला राज
इस फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए छत्तीसगढ़ मार्कफेड ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम की मदद ली। एआई विश्लेषण में सामने आया कि
- मुंगेली में 207
- बिलासपुर में 47
- धमतरी में 36
- बलौदाबाजार में 33
- सक्ती में 32
ट्रकों से एक ही समय में दो बार धान का उठाव दिखाया गया। यानी वाहन नंबर वही, लेकिन रिकॉर्ड में धान की निकासी कई बार।
मुंगेली में 15 से अधिक राइस मिलर्स ने सेवा सहकारी समितियों से ट्रकों में दोगुना से ज्यादा धान उठा लिया। खास तौर पर उपलता राइस मिल द्वारा एक ही ट्रक नंबर से 57 बार एक ही केंद्र से धान उठाने की एंट्री दर्ज की गई।
कंप्यूटर एंट्री में भी हेराफेरी
जांच में यह भी सामने आया कि समितियों के कंप्यूटर ऑपरेटर्स ने एक ट्रक में 30 क्विंटल की जगह 300 क्विंटल तक धान की फर्जी एंट्री कर दी। यह गड़बड़ी एक-दो बार नहीं बल्कि कई बार दोहराई गई। एआई सिस्टम ने बार-बार एक ही गाड़ी के उपयोग और असामान्य पैटर्न को चिन्हित कर पूरे घोटाले का पर्दाफाश किया।
फर्जीवाड़ा कैसे हुआ और किसे फायदा मिला?
नियमों के अनुसार राइस मिलर्स को उनकी मिलिंग क्षमता के हिसाब से ही धान उठाना होता है, ताकि समय पर सरकार को चावल लौटाया जा सके। लेकिन प्रदेश के करीब 800 राइस मिलर्स ने समितियों के अधिकारियों से सांठगांठ कर तय सीमा से अधिक धान उठा लिया।
एक ही ट्रक नंबर से बार-बार धान उठाकर उसकी ऑनलाइन एंट्री किसानों के खातों में की गई। किसानों को प्रति क्विंटल 2400 रुपये भुगतान दिखाया गया, जबकि 700 रुपये बोनस की राशि राइस मिलर्स और समिति अधिकारियों ने आपस में बांट ली।
इन राइस मिलर्स के नाम जांच में सामने आए
मुंगेली, धमतरी, जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, बेमेतरा, कवर्धा, बिलासपुर, सरगुजा, जशपुर, मानपुर और बालोद सहित कई जिलों की राइस मिलें जांच के दायरे में हैं। (सूची प्रशासनिक जांच का हिस्सा है)
मार्कफेड का बयान
छत्तीसगढ़ मार्कफेड के एमडी जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि
“राज्य के कई जिलों में एक ही गाड़ी से लाखों क्विंटल धान बाहर ले जाने की गड़बड़ी सामने आई है। दोषियों से पूरी वसूली की जाएगी। सभी जिलों के कलेक्टर जांच कर रहे हैं और राइस मिलर्स पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।”







