छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बड़े संगठनात्मक बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार प्रदेश महिला कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर यह चर्चा जोरों पर है कि संगठन को जल्द ही एक नया, सक्रिय और प्रभावशाली चेहरा सौंपा जा सकता है, जिसमें बालोद विधायक संगीता सिन्हा की नियुक्ति लगभग तय है।
पिछले कुछ वर्षों में संगीता सिन्हा ने विधानसभा में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। जनहित और विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी मुखर भूमिका, सरकार को घेरने की आक्रामक शैली और विपक्ष के बीच प्रभावी संवाद ने उन्हें एक जुझारू नेता के रूप में स्थापित किया है। उनकी इसी सक्रियता ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का भी ध्यान आकर्षित किया है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग संगीता सिन्हा के पक्ष में लामबंद होता नजर आ रहा है। समर्थकों का मानना है कि विधायक के तौर पर उन्हें संसदीय प्रक्रियाओं की अच्छी समझ है, वे महिलाओं के मुद्दों को मजबूती से उठाने में सक्षम हैं और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। यही कारण है कि संगठन को नई दिशा देने के लिए उनके नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
आगामी चुनावों और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जो न केवल पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाए, बल्कि जरूरत पड़ने पर सड़क से सदन तक संघर्ष कर सके। संगीता सिन्हा की कार्यशैली को देखते हुए माना जा रहा है कि वे महिला कांग्रेस को नई ऊर्जा और धार दे सकती हैं।
हालांकि अब तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रायपुर से लेकर दिल्ली तक बढ़ती राजनीतिक गतिविधियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि महिला कांग्रेस में जल्द ही बड़ा बदलाव संभव है। यदि संगीता सिन्हा को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो यह छत्तीसगढ़ की महिला राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।







