छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) में राज्य में दलहन और तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी को मंजूरी दे दी है। इसके तहत खरीफ सीजन 2025 के लिए 425 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
शुक्रवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया। राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए केंद्र ने फिलहाल खरीफ सीजन की फसलों के उपार्जन को स्वीकृति दी है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ और रबी सीजन को मिलाकर कुल 1 लाख 22 हजार मीट्रिक टन दलहन-तिलहन खरीदी का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। इसमें खरीफ के लिए 50 हजार मीट्रिक टन और रबी के लिए 72 हजार मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार ने केवल खरीफ सीजन के उपार्जन को मंजूरी दी है।
स्वीकृत योजना के तहत अरहर 21,330 मीट्रिक टन, उड़द 25,530 मीट्रिक टन, मूंग 240 मीट्रिक टन, सोयाबीन 4,210 मीट्रिक टन और मूंगफली 4,210 मीट्रिक टन की खरीदी की जाएगी। इस पर कुल 425 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने आवश्यकता पड़ने पर सोयाबीन और मूंगफली की अतिरिक्त खरीदी को भी मंजूरी देने का भरोसा दिलाया है।
भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए दलहन और तिलहन फसलों के समर्थन मूल्य भी घोषित कर दिए हैं। इसके अनुसार अरहर का MSP 8,000 रुपए प्रति क्विंटल, मूंग 8,768 रुपए, उड़द 7,800 रुपए, मूंगफली 7,800 रुपए और सोयाबीन 5,328 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है।
राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। मार्कफेड के माध्यम से सहकारी समितियों द्वारा उपार्जन किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के 22 जिलों में 222 उपार्जन केंद्र अधिसूचित किए जा चुके हैं। किसानों का पंजीयन कृषि विभाग के एकीकृत किसान पोर्टल पर जारी है। जिन किसानों ने अब तक पंजीयन नहीं कराया है, वे नजदीकी सहकारी समिति में संपर्क कर पंजीयन करा सकते हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि दलहन और तिलहन की MSP पर खरीदी से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, उनकी आय में बढ़ोतरी होगी और फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल छत्तीसगढ़ को दाल और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।







