पटना। इंडिगो एयरलाइंस का विमान संकट अब यात्रियों के लिए रोज़ नया इम्तिहान बनता जा रहा है। शनिवार को यह संकट अपने पांचवें दिन में पहुंच गया। देशभर में इंडिगो की करीब 800 फ्लाइट्स कैंसिल रहीं, जबकि पटना एयरपोर्ट से 13 जोड़ी यानी कुल 26 उड़ानें रद्द कर दी गईं। शाम तक लगभग दो लाख यात्री इससे प्रभावित हो चुके थे। कंपनी का दावा है कि 95 फीसदी रूट पर फ्लाइट संचालन सामान्य हो चुका है, लेकिन हकीकत में यात्रियों को अब भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पटना, दरभंगा, गया और पूर्णिया एयरपोर्ट पर हालात बेहद तनावपूर्ण नजर आए। कई यात्री फर्श पर बैठे दिखे, कुछ रोते रहे तो कुछ गुस्से में एयरलाइंस कर्मचारियों से उलझते रहे। काउंटर पर मौजूद स्टाफ बार-बार सिर्फ इतना कहता रहा कि “हम कुछ नहीं कर सकते।” किसी की विदेश में नौकरी जॉइन करनी थी लेकिन फ्लाइट कैंसिल हो गई, तो किसी छात्र की प्लेसमेंट से जुड़ी यात्रा अटक गई। नया टिकट लेने की कोशिश में यात्री किराया सुनकर सन्न रह गए।
हवाई सेवाएं बाधित होने का असर रेलवे पर भी साफ दिखने लगा है। दिल्ली जाने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें 12 दिसंबर तक पूरी तरह भर चुकी हैं। वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं है। मजबूर यात्री जनरल कोच में चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जहां धक्का-मुक्की की स्थिति बन रही है। बढ़ते दबाव को देखते हुए रेलवे ने तेजस राजधानी, डिब्रूगढ़ राजधानी समेत 37 प्रीमियम ट्रेनों में 116 अतिरिक्त एसी कोच जोड़े हैं। इसके साथ ही दिल्ली के लिए छह स्पेशल ट्रेनें भी चलाई गई हैं, जिससे रोज करीब 8120 अतिरिक्त यात्रियों को सफर की सुविधा मिल सके।
इस संकट के बीच दूसरी एयरलाइंस की किराया नीति ने यात्रियों की नाराजगी और बढ़ा दी है। पटना से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की फ्लाइट्स का किराया दो से तीन गुना तक बढ़ गया है। आम दिनों में 6 से 10 हजार रुपए में मिलने वाला पटना–मुंबई का टिकट अब 90 हजार रुपए तक पहुंच गया है। 7 दिसंबर को पटना से कोलकाता के लिए एयर इंडिया का टिकट 72 हजार से ज्यादा दिख रहा है, जबकि स्पाइसजेट मुंबई के लिए 90 हजार रुपए तक की मांग कर रही है। यात्रियों का कहना है कि जितने पैसों में विदेश की यात्रा हो जाती थी, उससे ज्यादा किराया अब देश के भीतर लिया जा रहा है।
टिकट बुकिंग के लिहाज से अभी इंडिगो की दरें सबसे कम नजर आ रही हैं, लेकिन यात्रियों को भरोसा नहीं है कि बुक की गई फ्लाइट सचमुच उड़ान भरेगी या आखिरी वक्त पर फिर कैंसिल हो जाएगी। सरकार की ओर से किराया सीमा तय किए जाने के बावजूद हालात में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।



