रायपुर। महासमुंद के तुमगांव क्षेत्र में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा हटाए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने जिला प्रशासन, पुलिस और एनएचआई पर कंपनी के दबाव में कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया है।
घटना तब शुरू हुई जब किसान मोर्चा के कार्यकर्ता अवैध करणी कृपा कंपनी के समीप महतारी की प्रतिमा स्थापित कर रहे थे। इसी दौरान कंपनी के एक कर्मचारी ने थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छह लोगों को हिरासत में ले लिया।
मोर्चा के अध्यक्ष और राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “छत्तीसगढ़ की धरती पर ही छत्तीसगढ़ महतारी का अपमान करने की सुपारी ली गई है।” उनका आरोप है कि मात्र 60 फीट ज़मीन के टुकड़े पर रखी जा रही प्रतिमा को एसडीओपी, तहसीलदार और कंपनी के गार्डों के दबाव में हटाया गया।
दुबे का कहना है कि जिस स्थान को एफआईआर में नेशनल हाईवे 53 बताया गया है, वह तथ्यहीन है। वास्तव में वह स्थान कंपनी द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला अवैध रास्ता है, जिसे कंपनी ने प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभावित कर सही ठहराने की कोशिश की है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी का नक्शा पास नहीं है और पूरे संचालन में कई अनियमितताएँ हैं। गिरफ्तारी के दौरान किसानों को थाने ले जाया गया और महिलाओं को वापस लाकर छोड़ दिया गया।
इस पूरे प्रकरण के विरोध में 3 दिसंबर को शाम 4 बजे, महासमुंद के लोहिया चौक में एक बड़ी जनसभा रखी गई है, जिसमें व्यापारी, आमजन और किसान शामिल होंगे। राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे भी बैठक में मौजूद रहेंगे।



