बस्तर में नक्सल संगठन की अंदरूनी टूट अब तेज़ी से सामने आने लगी है। लगातार आपसी मतभेद और खोखली विचारधाराओं के दबाव में रहने के बाद नक्सली अब हथियार छोड़कर शांति की राह पकड़ने लगे हैं।
जो लोग कल तक जंगलों में बंदूक थामे घूमते थे, वही आज नए जीवन की उम्मीद लेकर समाज से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
शुक्रवार की शाम इस बदलाव की एक बड़ी मिसाल देखने को मिली, जब डीकेएसजेडसी का सक्रिय सदस्य चैतू उर्फ़ श्याम दादा अपने 9 साथियों समेत पुलिस और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण करने पहुंचा। इन सभी ने वर्षों तक लाल गलियारे में सक्रिय रहकर कई नक्सली गतिविधियों में भाग लिया था।
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि नक्सली संगठन तेजी से कमजोर होता जा रहा है। अंदरूनी कलह और नेतृत्व की कमी के कारण कई सदस्य संगठन से मोहभंग होकर हथियार छोड़ रहे हैं।
आईजी के मुताबिक, नक्सली अब समझने लगे हैं कि हिंसा से उनका भला नहीं होने वाला — इसलिए वे अपने साथियों को भी मुख्यधारा में लौटने की सलाह दे रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी, बस्तर एसपी शलभ सिन्हा, जिला प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा बल के अधिकारियों की उपस्थिति में हथियार सौंपे।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस सरेंडर से नक्सल संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है और आने वाले दिनों में और भी सदस्य आत्मसमर्पण कर सकते हैं।







