हसदेव अरण्य में फिर बड़ा संकट! 4.5 लाख पेड़ों की कटाई को छत्तीसगढ़ सरकार की मंजूरी

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

रायपुर। हसदेव अरण्य के घने जंगलों में एक बार फिर संकट गहराने लगा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग और पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने की सिफारिश कर दी है। राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद यह प्रस्ताव अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास भेजा गया है। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही करीब साढ़े 4 लाख पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हो जाएगा। यह वही इलाका है जिसे प्रदेश का ‘लंग्स ज़ोन’ कहा जाता है।

इस परियोजना का प्रस्ताव राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) ने दिया है और खनन कार्य अडानी इंटरप्राइजेस को सौंपा गया है। जून 2025 में किए गए स्थल निरीक्षण और सरगुजा के प्रभागीय वन अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर वन विभाग ने इस प्रस्ताव को “राज्य शासन स्तर पर स्वीकृति योग्य” माना है। अब अंतिम निर्णय केंद्रीय मंत्रालय से अनुमोदन मिलने पर ही होगा। केंद्र की मंजूरी के बाद भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की शर्तें, परियोजना क्रियान्वयन और पेड़ कटाई की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रस्तावित खदान और वॉशरी की क्षमता 9 MTPA (Normative) और 11 MTPA (Peak) बताई गई है।

हसदेव अरण्य का यह क्षेत्र पिछले कई वर्षों से भारी विवाद और विरोध का केंद्र रहा है। हरैया, फत्तेहपुर, साल्ही, हर्रई सहित कई गांवों के आदिवासी समुदाय लगातार दावा करते रहे हैं कि खनन से जंगल, जलस्रोत और उनकी परंपरागत आजीविका पर गहरा असर होगा। उनका कहना है कि हाथियों और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होगा और बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा। 2022–23 में भी इसी मुद्दे पर महीनों तक आंदोलन चला था, जिसके बाद कई ग्राम सभाओं ने खनन के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए थे। हालांकि कुछ समुदाय रोजगार और विकास की उम्मीद में परियोजना का समर्थन भी कर रहे हैं।

पर्यावरणविदों ने हसदेव अरण्य को देश के सबसे समृद्ध और संवेदनशील वनों में से एक बताते हुए इस निर्णय पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर वन भूमि डायवर्जन से पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर स्थायी और विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। राज्य की अनुशंसा के बाद अब एक बार फिर इस क्षेत्र में विरोध तेज होने के आसार हैं।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment