उज्जैन के इस्कॉन मंदिर के शिखर पर 20 किलो का सुवर्ण-सुदर्शन चक्र स्थापित

Madhya Bharat Desk
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उज्जैन के भर्तृहरी क्षेत्र स्थित इस्कॉन मंदिर में रविवार का दिन धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक उल्लास से भर गया, जब मंदिर के शिखर पर सुदर्शन चक्र की भव्य प्रतिष्ठा की गई। यह महत्वपूर्ण आयोजन अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) द्वारा किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए संतों, गुरुओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर 4×4 फीट आकार का और लगभग 20 किलोग्राम वजनी सुदर्शन चक्र मंदिर शिखर पर स्थापित किया गया। यह चक्र मुंबई में विशेष रूप से तैयार करवाया गया था और इसे पूरी तरह से उच्च गुणवत्ता की स्वर्ण पॉलिश से अलंकृत किया गया है। इसकी चमक और भव्यता दूर से ही मंदिर की शोभा को और अधिक निखार देती है।

वैदिक परंपरा के अनुसार सुदर्शन चक्र भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य आयुध माना जाता है, जिसका उपयोग धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए किया जाता है। इसी मान्यता के साथ इस चक्र की प्रतिष्ठा को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया। आयोजन की शुरुआत सुबह से ही धार्मिक विधि-विधानों से हुई, जिसमें यज्ञ, मंत्रोच्चार, पूर्णाहुति और अभिषेक जैसे कई अनुष्ठान शामिल थे। पूरा परिसर वैदिक मंत्रों की ध्वनि से गूंजता रहा।

इस समारोह में अमेरिका से आए श्रील प्रभुपाद के शिष्य, इस्कॉन गुरु श्रीमद चंद्रमौली स्वामी महाराज और श्रीपाद केवल्य प्रभुजी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मायापुर गुरुकुल के मुख्य आचार्य श्रीपाद कृष्ण चैतन्य प्रभु ने पुरोहित की मुख्य भूमिका निभाई और परंपरागत विधियों के अनुसार प्रतिष्ठा प्रक्रिया को सम्पन्न किया।

विधि-विधान पूरे होने के बाद श्रद्धालुओं ने सुदर्शन चक्र के दर्शन किए और मंदिर प्रांगण में भक्ति-भावना का अद्भुत वातावरण बन गया। भक्तों का मानना था कि इस दिव्य चक्र के स्थापित होने से मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होगी और भक्तों पर भगवान का विशेष आशीर्वाद बना रहेगा।

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